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नलहाटी (Nalhati) पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले का एक छोटा लेकिन बेहद अहम कस्बा है. यह जगह अपनी धार्मिक पहचान और शांत माहौल के लिए जानी जाती है. यहां की सबसे बड़ी पहचान है मां नलाटेश्वरी का मंदिर, जिसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है. इसी वजह से साल भर श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते रहते हैं.
नलहाटी का नाम भी मां नलाटेश्वरी से ही जुड़ा माना जाता है. लोक मान्यता के अनुसार, यहां सती माता का “नल” यानी कंठ भाग गिरा था, इसलिए इस जगह का नाम नलहाटी पड़ा. मंदिर एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है, जहां से आसपास का नजारा बहुत सुंदर दिखता है. खासकर नवरात्र और दुर्गा पूजा के समय यहां काफी भीड़ रहती है.
धार्मिक महत्व के साथ-साथ नलहाटी एक सामान्य कस्बाई जीवन का उदाहरण भी है. यहां के लोग खेती, छोटे व्यापार और रोजमर्रा की नौकरियों पर निर्भर हैं. आसपास के गांवों से लोग बाजार करने और जरूरी कामों के लिए नलहाटी आते हैं. यहां का स्थानीय बाजार सादा लेकिन जरूरत की चीजों से भरा रहता है.
रेलवे कनेक्शन के कारण भी नलहाटी की अहमियत बढ़ जाती है. नलहाटी जंक्शन कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का पड़ाव है, जिससे यह इलाका दूसरे शहरों से जुड़ा हुआ है. इससे यात्रियों और व्यापार दोनों को सुविधा मिलती है.
यहां का जीवन तेज रफ्तार शहरों जैसा नहीं है, बल्कि सादगी और अपनापन यहां की पहचान है. त्योहारों के समय पूरा कस्बा रंगों और रोशनी से सज जाता है. होली, दुर्गा पूजा और काली पूजा बड़े उत्साह से मनाई जाती हैं.
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