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दिल्ली हाईकोर्ट ने ANI की उस अंतरिम याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है, जिसमें उसने OpenAI को अपने कंटेंट का इस्तेमाल ChatGPT को प्रशिक्षण देने से रोकने की मांग की थी. इस संबंध में जस्टिस अमित बंसल ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. इससे यह भारत का पहला ऐसा कानूनी मामला बन गया है, जिसमें एआई को ट्रेनिंग देने के लिए कॉपीराइट एक्ट, 1957 को लागू किया जा रहा है.
यह मामला 19 नवंबर 2024 को दायर किया गया था और 19 नवंबर 2024 से 27 मार्च 2026 तक अब तक 32 सुनवाई हो चुकी हैं. ANI ने यह मामला 2024 में दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि OpenAI ने बिना मंजूरी या लाइसेंसिंग फीस के उसके कॉपीराइट वाले न्यूज कंटेंट का इस्तेमाल किया था.
एएनआई ने OpenAI द्वारा वेब क्रॉलर (webcrawlers) के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई और दावा किया कि ChatGPT ने उसके कंटेंट को कॉपी कर ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया और यूजर्स के सवालों के जवाब में उसके लेखों को दोबारा पेश किया. एएनआई का तर्क है कि इसका उपयोग फेयर डीलिंग की छूट के दायरे में नहीं आता क्योंकि ChatGPT के जवाब व्यावसायिक उद्देश्य से प्रेरित होते हैं.
OpenAI ने कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया. उसका तर्क था कि ना तो कंपनी भारत में स्थित है और ना ही उसके सर्वर भारत में हैं. इसके साथ ही, उसने कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप का भी खंडन किया. OpenAI का कहना था कि उसका मॉडल केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कंटेंट का इस्तेमाल करता है, जैसे एएनआई का वेबसाइट पर उपलब्ध कंटेंट. कंपनी ने दावा किया कि वह केवल नॉन-एक्सप्रेसिव डेटा एलिमेंट्स का इस्तेमाल करती है, जो कॉपीराइट के दायरे से बाहर हैं.
OpenAI ने यह भी कहा कि एएनआई ने शब्दशः रिप्रोडक्शंस के सबूत नहीं दिए हैं और कंपनी ने बाद में एएनआई के डोमेन को भविष्य की ट्रेनिंग के लिए ब्लॉक कर दिया है.
यह विवाद अब पूरे सेक्टर का मुद्दा बन गया है, जिसमें छह इंटरवीनर्स (हस्तक्षेपकर्ता) शामिल हुए. डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स एसोसिएशन, इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री और फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स ने कॉपीराइट की रक्षा करने वाले कानून के पक्ष में दलीलें दीं, जबकि ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम, फ्लक्स लैब्स एआई प्राइवेट लिमिटेड और IGAP प्रोजेक्ट LLP ने OpenAI का साथ दिया.
एएनआई ने तर्क दिया कि कॉपीराइट का उल्लंघन डेटा के इंजेशन स्टेज पर ही हो जाता है. एएनआई ने यह भी बताया कि ChatGPT के आउटपुट में कुछ ऐसा कंटेंट पाया गया, जो केवल सब्सक्राइबर्स के लिए सीमित था. एएनआई ने अपने पत्रकारिता कार्यों के स्वामित्व पर जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना किसी को व्यावसायिक उपयोग का अधिकार नहीं देता.
एएनआई, डीएनपीए और आईएमआई ने कहा कि LLM की तकनीकी प्रक्रियाएं जैसे स्क्रैपिंग और टोकनाइजेशन संरक्षित कंटेंट को स्टोर करने और ट्रांसफोर्म का काम करती है, जिससे कई चरणों में कॉपीराइट का उल्लंघन होने की संभावना होती है. इसके विपरीत, OpenAI ने तर्क दिया कि LLM केवल सांख्यिकीय कंटेंट सीखते हैं और इसका स्टोरेज केवल टेंपरेरी और इंटरमीडिएट होता है.
एएनआई ने तर्क दिया कि भारतीय कॉपीराइट कानून transient storage की छूट के अलावा गैर-उल्लंघनकारी इंटरमीडिएट कॉपीज की अनुमति नहीं देता है. OpenAI ने इसका जवाब देते हुए कहा कि अस्थायी स्टोरेज का इस्तेमाल केवल नॉन-एक्सप्रेसिव फीचर्स निकालने के लिए किया जाता है, इसलिए यह कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं करता.
DNPA और IMI जैसे इंटरवीनर्स ने तर्क दिया कि डिजिटल स्टोरेज की छूट केवल गैर-व्यावसायिक पुस्तकालयों तक सीमित है और व्यावसायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर कॉपी करना जानबूझकर किया गया उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि AI-जनरेटेड आउटपुट बाजार में ANI के मूल कंटेंट के विकल्प की तरह काम करते हैं, जिससे आर्थिक नुकसान होता है।
धारा 52 के तहत फेयर डीलिंग छूट की व्याख्या पर तीखी बहस हुई. OpenAI ने दावा किया कि LLM ट्रेनिंग निजी शोध ना कि सार्वजनिक उपयोग का. वहीं, ANI ने व्यावसायिक AI सिस्टम के लिए इन छूटों को बढ़ाने का विरोध किया. DNPA और IMI जैसे इंटरवीनर्स ने तर्क दिया कि डिजिटल स्टोरेज संबंधी छूट केवल गैर-व्यावसायिक पुस्तकालयों तक सीमित है और व्यावसायिक स्तर पर बड़े पैमाने पर कॉपी करना जानबूझकर किया गया उल्लंघन है.
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