पटना के बैरिया निवासी सुनयना देवी अपनी मृत बहू शोभा देवी की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए आईजी कार्यालय पहुंचीं. अप्रैल 2023 में हुई इस हत्या के मामले में कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किया है, लेकिन पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर रही है.
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पटना से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहाँ एक बुजुर्ग सास अपनी मृत बहू को न्याय दिलाने के लिए पिछले दो सालों से सिस्टम की चौखट पर माथा टेक रही है. मामला पुलिस के कथित संरक्षण और आरोपियों के दबदबे के बीच फंसा हुआ है, जिससे पीड़ित परिवार डरा और सहमा हुआ है.
पटना के गोपालपुर थाना क्षेत्र के बैरिया की रहने वाली सुनयना देवी सोमवार को जोनल आईजी के दफ्तर पहुंचीं. उनकी आँखों में अपनी मृत बहू शोभा देवी के लिए न्याय की उम्मीद और कानून व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी थी. सुनयना देवी का कहना है कि वे न्याय के लिए दर-दर भटक रही हैं, लेकिन रसूखदार आरोपियों के खिलाफ पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है. वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस का हाथ खाली होना कई सवाल खड़े कर रहा है.
घटना 4 अप्रैल 2023 की है, जब सुनयना देवी के पड़ोस में रहने वाले कुछ दबंग लोग नशे की हालत में उनके घर में घुस आए थे. उन लोगों ने परिवार के सदस्यों के साथ बेरहमी से मारपीट की, जिसमें सुनयना देवी और उनकी बहू शोभा देवी बुरी तरह घायल हो गईं. इलाज के दौरान 9 अप्रैल 2023 को शोभा देवी ने दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद गोपालपुर थाने में मामला दर्ज किया गया था, लेकिन आरोप है कि आरोपियों की ऊंची पहुंच के कारण पुलिस ढिलाई बरत रही है.
सुनयना देवी का आरोप है कि मामला न्यायालय में जाने और आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद भी पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही है. इतना ही नहीं, एक अन्य मामले में आरोपियों के खिलाफ कुर्की का वारंट भी लंबित है. पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और उन पर केस वापस लेने या सुलह करने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं. उन्हें धमकियां दी जा रही हैं, जिससे परिवार को अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है.
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आईजी कार्यालय पहुँचने से पहले सुनयना देवी ने दो दिन पहले पूर्वी एसपी से भी मुलाकात की थी. वहां से उन्हें वापस थाने भेज दिया गया, जहाँ से उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. हार मानकर अब उन्होंने बड़े अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है. आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास भी बताया जा रहा है, जिससे इलाके में उनकी दहशत बनी हुई है. अब देखना यह है कि आईजी के हस्तक्षेप के बाद क्या इस पीड़ित परिवार को इंसाफ मिल पाता है या नहीं.
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