Post Office: इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में बड़ा 'झोल'! CAG की रिपोर्ट में आई ये चौकने वाली खामियां – Jagran

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कैग ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां उजागर की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने बिना मोबाइल सत्यापन के खाते खोले औ …और पढ़ें
कैग ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां उजागर की हैं।
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने बृहस्पतिवार को इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां उजागर करते हुए कहा कि बैंक ने मोबाइल नंबर का सत्यापन किए बगैर खाते खोले और कई ग्राहकों से जुड़ी जानकारी को एक ही मोबाइल नंबर से जोड़ दिया। एक रिपोर्ट में संसद में पेश कैग की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई। इस ऑडिट में यह भी पाया गया कि आईपीपीबी के बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय या कम इस्तेमाल वाले हैं।
रिपोर्ट कहती है, “सत्यापित मोबाइल नंबर के बगैर ही खाते खोले गए और कई ग्राहक सूचना ब्योरे (सीआईएफ) को एक ही मोबाइल नंबर से जोड़ दिया गया जो कि प्रणालीगत कमजोरी को दर्शाता है।”
कैग ने यह भी कहा कि ग्राहक के घर तक बैंकिंग सेवाएं मुहैया कराने का उपयोग भी सीमित रहा। इसमें कई अनुरोध या तो लंबित रहे, रद्द हुए या उन पर कार्रवाई नहीं हुई।
रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक ने अपने नेटवर्क विस्तार और ग्राहक आधार बढ़ाने में प्रगति की है, लेकिन संचालन, नियामकीय और प्रणालीगत समस्याओं के कारण वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में इसकी दक्षता प्रभावित हुई है।
इसके अलावा यूपीआई सेवाओं के मामले में भी बैंक का प्रदर्शन कमजोर पाया गया। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, आईपीपीबी का तकनीकी अस्वीकृति दर 2021-22 में 3.29 प्रतिशत और 2022-23 में 7.82 प्रतिशत रही जो रिजर्व बैंक के एक प्रतिशत से कम के लक्ष्य से काफी अधिक है।
इसके अलावा, वित्त वर्ष 2023-24 में आईपीपीबी की यूपीआई सेवाओं में कुल 362 घंटे तक व्यवधान रहा, जो अन्य भुगतान बैंकों- फिनो (19 घंटे), एयरटेल (52 घंटे) और पेटीएम पेमेंट्स बैंक (शून्य घंटे) की तुलना में बहुत अधिक है। कैग ने सिफारिश की है कि आईपीपीबी को यूपीआई लेनदेन से जुड़े मानकों को पूरा करने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था और प्रभावी प्रतिक्रिया तंत्र लागू करना चाहिए, ताकि ग्राहकों का भरोसा कायम रखा जा सके। 
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CAG यानी ‘नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक’ कहा जाता है। जिसका फुल फॉर्म Comptroller and Auditor General of India है। CAG भारत के ‘सरकारी खजाने का सबसे बड़ा रखवाला’ और एक स्वतंत्र ऑडिटर है। CAG का मुख्य काम सरकार ने जो पैसा खर्च किया है, क्या वह उसी काम के लिए खर्च हुआ है जिसके लिए संसद ने मंजूरी दी थी? इस बात की जांच-पड़ताल करना होता है।
यह कोई आम सरकारी विभाग नहीं है, बल्कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 148 (Article 148) के तहत स्थापित एक स्वतंत्र संस्था है। जिसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं। ये अपनी ऑडिट रिपोर्ट केंद्र सरकार के मामले में राष्ट्रपति को और राज्य सरकारों के मामले में राज्यपाल को सौंपता है। इसके बाद इस रिपोर्ट को संसद या विधानसभा में पेश किया जाता है (जैसे इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक वाली रिपोर्ट संसद में पेश की गई)।
देश के कई बड़े घोटाले 2G स्पेक्ट्रम घोटाला, कोयला आवंटन घोटाला (Coal Scam), कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला (CWG Scam) की जानकारी CAG की ऑडिट रिपोर्ट में ही सामने आई थी।

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