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प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास कार्यक्रम शौर्य पथ में इस सप्ताह हमने ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) से जानना चाहा कि भारतीय विदेश सचिव की चीन यात्रा के दौरान संबंधों में सुधार की दिशा में और कदम उठाये गये हैं। इसे कैसे देखते हैं आप? इसके जवाब में उन्होंने कहा कि संबंध सुधर तो रहे हैं लेकिन भारत को अब भी चीन पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां तक हालिया वार्ता की बात है तो भारत और चीन ने संबंधों के ‘पुनर्निर्माण’ के लिए कई उपायों की घोषणा की है जिसमें इस साल गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करना और सीधी उड़ानें बहाल करने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत होना शामिल है। उन्होंने कहा कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी की चीन के उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के साथ बीजिंग में व्यापक वार्ता के बाद इन निर्णयों की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमापार नदियों से संबंधित आंकड़ों और अन्य सहयोग का प्रावधान पुनः शुरू करने को लेकर चर्चा के लिए भारत-चीन विशेषज्ञ स्तरीय तंत्र की बैठक शीघ्र बुलाने पर भी सहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि विदेश सचिव ने विदेश मंत्री वांग यी और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के मंत्री लियू जियानचाओ से भी मुलाकात की।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि मिसरी और सुन ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की व्यापक समीक्षा की और संबंधों में स्थिरता और पुनर्निर्माण करने के लिए कुछ जन-केंद्रित कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में दोनों पक्षों ने 2025 की गर्मियों में कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर शुरू करने का फैसला किया। प्रासंगिक तंत्र मौजूदा समझौतों के अनुसार ऐसा करने के तौर-तरीकों पर चर्चा करेगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवाएं फिर शुरू करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति हुई है। दोनों पक्षों के संबंधित तकनीकी अधिकारी जल्द ही इसके लिए एक रूपरेखा पर बातचीत करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने मीडिया और थिंक टैंक के बीच बातचीत आदि को अधिक बढ़ावा देने और सुविधाजनक बनाने के लिए उचित कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय के बयान में पिछले वर्ष अक्टूबर माह में कज़ान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई वार्ता का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अक्टूबर में कज़ान में हुई बैठक में सहमति बनी थी, विदेश सचिव मिसरी और चीनी उप विदेश मंत्री सुन ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की “व्यापक” समीक्षा की और संबंधों को ‘‘स्थिर करने और पुनर्निर्माण” करने के लिए कुछ जन-केंद्रित कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।
ब्रिगेडियर श्री डीएस त्रिपाठी जी (सेवानिवृत्त) ने कहा कि दोनों पक्षों का मानना है कि 2025 जो भारत और चीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ है, का उपयोग एक-दूसरे के बारे में बेहतर जागरूकता पैदा करने और जनता के बीच आपसी विश्वास और भरोसा बहाल करने के लिए सार्वजनिक कूटनीति प्रयासों को दोगुना करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले महीने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बीजिंग का दौरा किया था और सीमा विवाद पर विशेष प्रतिनिधि (एसआर) वार्ता के ढांचे के तहत चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बातचीत की थी।
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