Protest Against Israel in India: ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले के साथ ही दुनिया के कई देश ईरान के पक्ष और इस्राइल- अमेरिका के विरोध में आ गए हैं. भारत ने अभी इसपर अपना आधिकारिक रुख साफ़ नहीं किया है, लेकिन यहाँ की जनता नैतिक रूप से ईरान के समर्थन में खड़ी है. कई इलाकों में लोग ईरान पर हमले के विरोध में सड़कों पर उतर गए हैं.
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नई दिल्ली: अमेरिका और इसराइल के ईरान पर संयुक्त कार्रवाई के बाद जवाबी हमले के तौर पर ईरान ने एक साथ अमेरिका के 7 मित्र देशों पर हमले कर दिए हैं. ईरान ने इसराइल समेत मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले देश को निशाना बनाया है. इस हमले में ईरान जहाँ सामरिक महत्व के ठिकानों को निशाना बना रहा है वहीँ, अमेरिका और इसराइल मानव आबादी पर भी हमले कर रहा है. ईरान में एक स्कूल को टारगेट कर हमले किये गए जिसमें १०० से ज्यादा बच्चे मारे गए हैं.
अमेरिका के मित्र देशों को छोड़ दे तो पूरी दुनिया इस वक़्त ईरान का नैतिक रूप से समर्थन कर रही है, और अमेरिका- इसराइल की दादागिरी की आलोचना की जा रही है. भारत ने अभी तक अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया है, जबकि मिडिल ईस्ट में लाखों की तादाद में भारतीय रहते हैं. जंग लम्बा छिड़ने पर वहां के नागरिकों के बाद अगर सबसे बड़ा संकट आएगा तो अनिवासी भारतीय पर आने वाला है. इस जंग के शुरू होते भारत की आम जनता ईरान के पक्ष में खड़ी हो गयी है. भारत का आम नागरिक अमेरिका और इसराइल के खिलाफ है. यहाँ तक कि भारत के मुसलमान भी सऊदी अरब, कतर, बहरीन और UAE जैसे अमेरिका के मित्र देशों की आलोचना कर रहे हैं और ईरान का खुलकर समर्थन कर रहे हैं.
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लखनऊ में शिया सेंट्रल वक्फ़ बोर्ड ने ईरान पर हमले की निंदा की है. ईरान पर हमले को बेवजह और एकतरफ़ा हमला बताया है. बोर्ड के अध्यक्ष अली ज़ैदी ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ बताया है, और कहा है कि यह संप्रभु राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता पर हमला है. इससे वैश्विक शांति को गंभीर ख़तरा हो सकता है. उन्होंने सभी पक्षों से तत्काल युद्धविराम की अपील की है.
वहीं, सेंट्रल कश्मीर के बडगाम में, शिया समुदाय के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन किया और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के लिए सपोर्ट दिखाते हुए, अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ नारे लगाए. डिस्ट्रिक्ट बारामूला के मीरगुढ इलाके में भी अमेरिका के खिलाफ शिया समुदाय ने प्रदर्शन किया. अमेरिका इस्राइल के खिलाफ नारेबाजी की. प्रदर्शनकारी अमेरिका को विश्वशांति और मानवता के लिए खतरा बता रहे हैं.
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