उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक, मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया ने एक बड़े राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त मोर्चा खोलते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है। जहाँ ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया की तुलना हिटलरशाही और तुगलकी फरमानों से करते हुए चुनाव आयोग को ‘टॉर्चर कमीशन’ की संज्ञा दी है, वहीं अखिलेश यादव ने इसे ‘PDA के वोटों की डकैती’ बताया है। विपक्ष का गंभीर आरोप है कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर फर्जी हस्ताक्षरों और गलत सूचनाओं के आधार पर पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी का दावा है कि यह चुनाव से पहले ही चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की एक सोची-समझी साजिश है। विपक्ष के अनुसार, SIR के नाम पर वोटरों का ‘शुद्धिकरण’ नहीं, बल्कि विपक्ष के वोट बैंक का ‘सफाया’ किया जा रहा है, जिसने अब संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक, मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया ने एक बड़े राजनीतिक संग्राम का रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ संयुक्त मोर्चा खोलते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है। जहाँ ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया की तुलना हिटलरशाही और तुगलकी फरमानों से करते हुए चुनाव आयोग को ‘टॉर्चर कमीशन’ की संज्ञा दी है, वहीं अखिलेश यादव ने इसे ‘PDA के वोटों की डकैती’ बताया है। विपक्ष का गंभीर आरोप है कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर फर्जी हस्ताक्षरों और गलत सूचनाओं के आधार पर पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी का दावा है कि यह चुनाव से पहले ही चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की एक सोची-समझी साजिश है। विपक्ष के अनुसार, SIR के नाम पर वोटरों का ‘शुद्धिकरण’ नहीं, बल्कि विपक्ष के वोट बैंक का ‘सफाया’ किया जा रहा है, जिसने अब संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
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