चीन में SCO समिट के दूसरे दिन भारत को बड़ी सफलता मिली है। घोषणापत्र में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की गई है।
इस दौरान पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ भी मौजूद थे। घोषणा पत्र में कहा गया कि इस हमले के अपराधियों, आयोजकों और उन्हें समर्थन देने वालों को सजा दिलाना जरूरी है।
गौरतलब है कि इससे पहले जून में हुई रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान SCO के घोषणापत्र में पहलगाम हमले का जिक्र भी नहीं था। इसे लेकर भारत ने नाराजगी जताई थी। साथ ही इस पर साइन करने से इनकार कर दिया था।
SCO समिट से जुड़ी 5 तस्वीरें…
मोदी बोले- कुछ देशों को आतंकवाद के खुले समर्थन की छूट क्यों
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन दौरे आखिरी दिन SCO की बैठक को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद को दुनिया के लिए खतरा बताया।
उन्होंने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए इसे आतंकवाद का सबसे बुरा रूप बताया। मोदी ने कहा कि भारत आतंकवाद को पिछले चार दशकों से झेल रहा है।
पीएम ने सवाल उठाया कि कुछ देशों का आतंकवाद को खुला समर्थन कैसे स्वीकार किया जा रहा है।
मोदी के चीन दौरे से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन (SCO) स्थिरता और सुरक्षा का नया मॉडल है। उन्होंने बताया कि यह अब पुराने, यूरोप-केन्द्रित और यूरो-अटलांटिक मॉडल की जगह ले रहा है।
चीन में SCO समिट के दूसरे दिन भारत को बड़ी सफलता मिली है। घोषणापत्र में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की गई है।
इस दौरान पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ भी मौजूद थे। घोषणा पत्र में कहा गया कि इस हमले के अपराधियों, आयोजकों और उन्हें समर्थन देने वालों को सजा दिलाना जरूरी है।
गौरतलब है कि इससे पहले जून में हुई रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान SCO के घोषणापत्र में पहलगाम हमले का जिक्र भी नहीं था। इसे लेकर भारत ने नाराजगी जताई थी। साथ ही इस पर साइन करने से इनकार कर दिया था।
SCO की बैठक में पुतिन ने कहा कि
मैं यूक्रेन में संकट को हल करने के लिए भारत और चीन के प्रयासों की सराहना करता हूं।
मोदी ने आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आतंकवाद पर किसी भी तरह का दोहरा मापदंड स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा,
यह हमला मानवता में विश्वास रखने वाले हर देश और व्यक्ति के लिए चुनौती है। ऐसे में यह स्वाभाविक सवाल है कि क्या कुछ देशों द्वारा आतंकवाद को दिया जा रहा खुला समर्थन स्वीकार किया जा सकता है।
SCO बैठक में मोदी ने कहा,
भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद का दंश झेल रहा है। हाल ही में हमने पहलगाम में आतंकवाद का सबसे बुरा रूप देखा। मैं इस दुख की घड़ी में हमारे साथ खड़े मित्र देश के प्रति आभार व्यक्त करता हूं।
SCO की बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा,
सुरक्षा, शांति और स्थिरता किसी भी देश के विकास का आधार हैं। लेकिन आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद इस राह में बड़ी चुनौतियां हैं। आतंकवाद सिर्फ एक देश की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक साझा चुनौती है। कोई भी देश, कोई भी समाज, कोई भी नागरिक इससे खुद को सुरक्षित नहीं मान सकता।
SCO की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि
मुझे इस सम्मेलन में शामिल होकर खुशी हो रही है। मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग का शानदार स्वागत के लिए आभार व्यक्त करता हूं। आज उज्बेकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस है, मैं उन्हें भी बधाई देता हूं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने SCO में एक सकारात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने संगठन के लिए भारत की सोच और नीति को तीन स्तंभों पर आधारित बताया। ये तीन स्तंभ S- सिक्योरिटी, C- कनेक्टिविटी और O अपॉर्चुनिटी है।
SCO समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस साल शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन के सदस्य देशों को 2 बिलियन युआन यानी करीब 281 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ग्रांट देने की घोषणा की।
यह मदद सदस्य देशों की आर्थिक और विकास संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए होगी।
SCO बैठक को संबोधित करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि यह संगठन आतंकवाद, अलगाववाद , उग्रवाद के खिलाफ है। जिनपिंग ने कहा कि चीन SCO को आगे ले जाने का काम करेगा। उन्होंने आगे कहा कि वैश्विक नीति में धमकाना नामंजूर है।
मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों 9:45 से 10:30 बजे तक बातचीत करेंगे। इसके बाद मोदी भारत के लिए रवाना हो जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन SCO के मंच पर एक साथ नजर आए। तीनों नेता आपस में बात करते देखे गए। इस दौरान तीन देशों की ट्रायो डिप्लोमेसी देखने को मिली।
1. गलवान झड़प के बाद मोदी का पहला चीन दौरा: 5 साल पहले भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद यह पहला मौका है जब मोदी चीन पहुंचे हैं। इस वजह से पूरी दुनिया की नजर इस समिट पर है।
2. ट्रम्प का SCO देशों पर हाई टैरिफ: ट्रम्प ने भारत (50%), चीन (30%), कजाकिस्तान (25%) समेत बाकी SCO देशों पर भी हाई टैरिफ लगाया है। ऐसे में यह उन देशों के लिए अहम है जो अमेरिकी दबाव के खिलाफ साझा मंच पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं।
3. अमेरिका की लीडरशिप को चुनौती: जिनपिंग इस समिट को अमेरिका के नेतृत्व वाले ग्लोबल ऑर्डर का विकल्प पेश करने का मंच बनाना चाहते हैं। चीन यह दिखाना चाहता है कि वह रूस, भारत, ईरान जैसे देशों के साथ मिलकर ऑप्शनल पावर बन सकता है।
4. भारत का एजेंडा- आतंकवाद पर फोकस: जून 2025 में हुई SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने जॉइंट स्टेटमेंट पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया था। दरअसल, उसमें पहलगाम आतंकी हमले का कोई जिक्र नहीं था। अब मुख्य मीटिंग में भारत, आतंकवाद पर चर्चा और समर्थन जुटाने की कोशिश करेगा। पाकिस्तान की मौजूदगी में यह मुद्दा छाया रहेगा।
5. 20 से ज्यादा देशों की मौजूदगी: इस बार समिट में सिर्फ SCO सदस्य ही नहीं, बल्कि ऑब्जर्वर और पार्टनर देशों को मिलाकर 20 से ज्यादा देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं।
6. भारत-चीन में रिश्ते बेहतर हुए: गलवान के बाद पहली बार सीमा और व्यापार पर कुछ नरमी दिखी है। सीधी उड़ानें शुरू हुईं, बॉर्डर ट्रेड पर बातचीत हुई, कैलाश मानसरोवर यात्रा बहाल हुई।
SCO शिखर सम्मेलन को कवर करने के लिए 3000 से ज्यादा पत्रकार पहुंचे हैं, जो इसकी वैश्विक अहमियत को दिखाता है।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने रविवार को पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात का डिटेल ब्योरा दिया। यह पिछले एक साल में दोनों नेताओं की दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले दोनों अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में मिले थे।
मोदी के चीन दौरे के बाद भारत और चीन के रिश्तों में नरमी के संकेत दिखे हैं। 2020 की गलवान झड़प के बाद पहली बार दोनों देशों ने सीमा और व्यापार से जुड़े कई अहम मसलों पर सहमति बनाई है।
लेकिन सीमा विवाद और पानी के मसले जैसे बड़े विवाद बने हुए हैं। आर्थिक दबाव और वैश्विक हालात ने दोनों को साथ बैठने पर मजबूर किया है, पर पूरी तरह भरोसा बनने में वक्त लग सकता है।
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