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US-Israel-Iran War Impact on India: भारत मे सोना -चांदी महंगा!अमेरिका-ईरान युद्ध का बड़ा असर, तेल से लेकर बासमती
US-Israel-Iran War Impact on India: अमेरिका और ईरान के दरम्यान भड़की जंग अब सीमाओं में कैद नहीं रही। इसका दायरा इजरायल से आगे बढ़कर सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और बहरीन तक फैल चुका है। ईरान की जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को जंग के मुहाने पर ला खड़ा किया है। सियासी हलकों में इसे तेल का तूफान कहा जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अर्थशास्त्री डॉ रामानंद पाण्डेय के अनुसार पूरा मिडिल ईस्ट कच्चे तेल का बड़ा गढ़ है और भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। हालिया महीनों में वैश्विक दबाव के चलते भारत ने रूस की जगह सऊदी अरब से ज्यादा तेल खरीदना शुरू किया था। अब अगर जंग लंबी खिंची, तो सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स की मानें तो क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। यह इजाफा सीधे पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीज़ों की कीमतों में आग लगा सकता है।
अर्थशास्त्री डॉ रामानंद पाण्डेय काकहना है कि तेल की कीमतों में उछाल डॉलर की मांग बढ़ाएगा। नतीजतन डॉलर मजबूत और रुपया कमजोर हो सकता है। मुद्रा बाजार की यह हलचल आयात महंगा करेगी और महंगाई की मार आम आदमी की जेब तक पहुंचेगी। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि बढ़ती महंगाई सरकार के लिए आर्थिक मोर्चे पर बड़ी चुनौती बन सकती है।
अर्थशास्त्री डॉ रामानंद पाण्डेय के अनुसार घरेलू शेयर बाजार पर भी वैश्विक अनिश्चितता का साया गहरा सकता है। निवेशक घबराहट में सुरक्षित विकल्पों की तरफ रुख करते हैं। अगर गिरावट का सिलसिला जारी रहा तो सोना-चांदी के भाव आसमान छू सकते हैं। जानकारों का अनुमान है कि सोना 1,70,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 3,00,000 रुपये प्रति किलो के स्तर तक जा सकती है।
यही नहीं, भारत का बासमती चावल निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। ईरान और खाड़ी देश भारतीय बासमती के बड़े खरीदार हैं। जंग के कारण भुगतान और शिपमेंट बाधित हुए तो किसानों और निर्यातकों को झटका लग सकता है। डॉ रामनंद पण्डेय के अनुसार मिडिल ईस्ट की जंग सिर्फ रणभूमि तक सीमित नहीं यह आर्थिक मोर्चे पर भी भारत के लिए इम्तिहान साबित हो सकती है।