कानपुर के विक्रमाजीत सिंह सनातन धर्म (VSSD) महाविद्यालय में हिंदी विभाग के 100 साल पूरे होने पर सोमवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। महाविद्यालय और हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के साझा प्रयास से इस संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।
वक्ताओं ने ‘समकालीन हिंदी साहित्य एवं पत्रकारिता का राष्ट्र-निर्माण में योगदान’ विषय पर बेबाकी से बात रखी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व सांसद और वरिष्ठ संपादक तरुण विजय ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्रता से पहले पत्रकारिता ने सोई हुई राष्ट्रीय चेतना को जगाने का काम किया, जबकि आज यह राष्ट्र निर्माण की दिशा तय कर रही है।
साहित्य समाज को सुंदर बनाने का जरिया
संगोष्ठी के अध्यक्ष और प्रख्यात साहित्यकार प्रो. ओम निश्चल ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि ज्ञान के मार्ग में कभी भी संकोच को बाधा नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा असल में सुंदर वह व्यक्ति नहीं है जो खुद को सुंदर कहता फिरे, बल्कि वह है जो अपने कर्मों और विचारों से इस दुनिया को सुंदर बनाने का माद्दा रखता हो।
उन्होंने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का जाल नहीं बल्कि समाज के परिष्कार का सबसे सशक्त माध्यम है। इससे पहले कॉलेज की प्राचार्या प्रो. नीरू टंडन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि साहित्य और पत्रकारिता दोनों ही युग के सत्य को दिशा देने का काम करते हैं।
गौरवशाली इतिहास और उत्तरदायित्व का बोध
प्रो. राकेश शुक्ला ने विषय प्रवर्तन के दौरान विभाग के 100 साल के सफरनामे को परत-दर-परत खोला। उन्होंने पूर्व आचार्यों के योगदान और शोध की परंपरा को याद दिलाते हुए कहा कि यह शताब्दी वर्ष केवल जश्न मनाने का बहाना नहीं है, बल्कि यह अपनी जिम्मेदारियों को फिर से याद करने का अवसर है।
कॉलेज प्रबंध समिति की सचिव सीए नीतू सिंह ने भी इस बात पर जोर दिया कि हिंदी साहित्य हमारी सांस्कृतिक पहचान है और ऐसे आयोजनों से छात्रों में बौद्धिक परिपक्वता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना पैदा होती है।
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