एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की प्रतिरोधक क्षमता के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि है। जिस ‘मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल’, यानी एमआईआरवी तकनीक से यह लैस है, उसमें मुख्य मिसाइल कई वॉरहेड्स दागती है। नतीजतन, दुश्मन की वायु सुरक्षा प्रणाली को चकमा देना आसान हो जाता है। भारत के अलावा अभी अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन और रूस के पास ही यह तकनीक हैै। हालांकि, परीक्षण की गई मिसाइल की मारक-क्षमता नहीं बताई गई है, लेकिन माना जा रहा है कि साल 2024 में ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत इसी तकनीक से लैस अग्नि 5 का सफल परीक्षण हो चुका है और उसकी रेंज करीब 5,000 किलोमीटर थी, इसलिए इस बार इससे अधिक ही होगी। इसे अग्नि 6 की पूर्वपीठिका भी कहा जा रहा है, जिसकी पुष्टि कम-से-कम दो तथ्य कर रहे हैं। पहला, परीक्षण की गई मिसाइल परमाणु-सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक थी, जिसकी मारक क्षमता अमूमन 5,500 किलोमीटर से अधिक होती है। दूसरा, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष समीर वी कामत ने अभी-अभी कहा है कि संगठन अग्नि 6 मिसाइल के निर्माण के लिए तैयार है, बस सरकार से हरी झंडी मिलने की देर है।
ताजा परीक्षण आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा तकनीक का अप्रतिम उदाहरण है। नई दिल्ली के पास निस्संदेह ब्रह्मोस, पृथ्वी, नाग, आकाश जैसी स्वेदशी मिसाइलों का जखीरा है, लेकिन इनमें ध्वजवाहक अग्नि ही है। गुजरे साढ़े तीन दशकों में इसने 700 किलोमीटर से लेकर 5,000 किलोमीटर तक की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की है। आज भारत के सुरक्षा बेड़े में इसकी पांचवीं पीढ़ी की मिसाइलें हैं, जो परमाणु हथियार तक ले जा सकती हैं। इस बीच ऐसी महारत भी हासिल की गई है कि ये मिसाइलें सड़क या रेल प्लेटफॉर्म से भी लॉन्च की जा सकती हैं। अभी जो परीक्षण हुआ है, उसका लक्ष्य विशेषकर पश्चिमी मोर्चे, उत्तरी सीमा और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की क्षमता को मजबूत करना है, जो सामरिक ताकत का नया केंद्र बनता जा रहा है। संभवत: इन्हीं वजहों से पाकिस्तान की तरफ से चिंता जताई गई है कि भारत दुनिया के किसी भी देश को निशाना बनाने की राह पर निकल चुका है। हालांकि, विश्व बिरादरी जानती है कि भारत के रक्षा कार्यक्रम आत्म-सुरक्षा के इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि ‘शत्रु को आक्रमण से रोकने के लिए न्यूनतम संख्या में हथियार रखे जाएं’।
अग्नि की इस सफलता का प्रभाव भारत के रक्षा उद्योग पर भी पड़ेगा। देश का रक्षा-निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो चुका है। भारत अब दुनिया के 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण बेच रहा है, जिनमें मिसाइल, आर्टिलरी गन, रडार, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम जैसे उन्नत साजो-सामान भी शामिल हैं। दूसरे देश भारतीय सुरक्षा प्रणाली पर लगातार भरोसा जताने लगेे हैं और घरेलू उत्पादन में भी अनवरत वृद्धि हो रही है। साल 2029 तक रक्षा-निर्यात 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को पाना कठिन नहीं लगता। खासकर, दो दिन पहले डीआरडीओ द्वारा किया गया ‘टीएआरए’ का सफल परीक्षण, जिसमें साधारण बम को भी लक्षित हमले के लिहाज से ‘गाइडेड बम’ बनाया जा सकता है, और अब एमआईआरवी की सफलता यह भरोसा जगाती ही है कि भारत समय से पहले ही अपना लक्ष्य हासिल कर सकता है।
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