मुख्य बातें
Mukesh ambani vs Gautam adani: देश के दो बड़े कारोबारी समूहों मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और गौतम अडानी के अडानी ग्रुप के बीच अब एक और सेक्टर में मुकाबले की जमीन तैयार होती दिख रही है। दरअसल, रिलायंस इंडस्ट्रीज एल्युमीनियम इंडस्ट्री में उतरने की योजना पर विचार कर रही है। इस सेक्टर में अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने कुछ महीने पहले ही 11.5 अरब डॉलर का निवेश किया था।
मिंट की एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि RIL का यह कदम मेटल प्रोडक्शन में उतरने की संभावना तलाशने का हिस्सा है। कंपनी अपने प्रस्तावित कोल गैसीफिकेशन बिजनेस की कमर्शियल व्यवहार्यता को बेहतर बनाना चाहती है। सूत्र के मुताबिक रिलायंस की योजना आंध्र प्रदेश में कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट लगाने की है। कंपनी ने अब तक राज्य में रेचेरला और चिंताल्पुडी में नीलामी के जरिए दो कोल ब्लॉक हासिल किए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में रिलायंस ग्रुप ने आंध्र प्रदेश में भारत का पहला इंटीग्रेटेड अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए 30 साल में ₹2.73 ट्रिलियन के निवेश का प्रस्ताव दिया है।
एक सूत्र ने बताया कि रिलायंस की योजनाएं अभी शुरुआती चरण में हैं लेकिन हाल ही में कंपनी ने ओडिशा में कारलापट बॉक्साइट ब्लॉक की नीलामी में हिस्सा लिया था। बता दें कि बॉक्साइट एल्युमिनियम बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला प्रमुख कच्चा माल है। बहरहाल, अगर रिलायंस एल्युमीनियम कारोबार में उतरती है तो कोयला, गैसीकरण, ऊर्जा और मेटल उत्पादन को एक साथ जोड़कर बड़ा इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल तैयार किया जा सकता है।
रिलायंस की संभावित एंट्री ऐसे समय हो रही है जब अडानी एंटरप्राइजेज एल्युमीनियम सेक्टर में बड़ा दांव लगा चुका है। जून में अडानी एंटरप्राइजेज ने UAE की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) के साथ मिलकर ओडिशा में करीब 11.5 अरब डॉलर के निवेश से सालाना 20 लाख टन क्षमता वाली एल्युमीनियम परियोजना विकसित करने की योजना घोषित की थी।
इससे वेदांता एल्युमीनियम और हिंडाल्को जैसी पहले से मौजूद कंपनियों के साथ मुकाबला शुरू हो गया है। अगर रिलायंस अपनी योजनाओं पर आगे बढ़ती है तो वह इस सेक्टर में आने वाली चौथी बड़ी कंपनी होगी। बता दें कि भारत का एल्युमीनियम सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिफिकेशन, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और मैन्युफैक्चरिंग की वजह से मजबूत स्ट्रक्चरल ग्रोथ के दौर में प्रवेश कर रहा है। एक अनुमान के मुताबिक, देश में एल्युमिनियम की खपत FY26 के करीब 60 लाख टन से बढ़कर FY30 तक 85 लाख टन और FY47 तक करीब 2.8 करोड़ टन हो सकती है।
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