अनावश्यक आयात को कम करने के लिए सोने-चांदी पर ड्यूटी बढ़ाई, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने पर जोर – Jagran

कृपया धैर्य रखें।
वित्त मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संकट के बीच अनावश्यक आयात घटाने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने, चांदी व प्लेटिनम पर आयात शुल्क बढ़ाया है। …और पढ़ें
सरकार ने सोने-चांदी पर ड्यूटी बढ़ाई।
सोने, चांदी, प्लेटिनम पर आयात शुल्क में वृद्धि।
विदेशी मुद्रा भंडार बचाने, अनावश्यक आयात घटाने का लक्ष्य।
सोने के दाम बढ़े, तस्करी बढ़ने की आशंका।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट से उपजी चुनौतियों को कम करने के लिए वित्त मंत्रालय ने सोना, चांदी व प्लेटिनम के आयात शुल्क में बढ़ोतरी की घोषणा की है। ताकि अनावश्यक आइटम के बढ़ते आयात को हतोत्साहित करके विदेशी मुद्रा के भंडार को बचाने में मदद मिल सके।
सोने व चांदी के आयात पर अब छह प्रतिशत की जगह 15 प्रतिशत का शुल्क लगेगा। प्लेटिनम के आयात पर अब 6.4 प्रतिशत की जगह 15.4 प्रतिशत शुल्क लगेगा। शुल्क बढ़ोतरी के साथ ही बुधवार को घरेलू बाजार में सोने के दाम दस हजार रुपए प्रति 10 ग्राम (24 कैरेट) की तेजी के साथ 1.65 लाख के पास पहुंच गए।
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) में 7 से 8 प्रतिशत की तेजी देखी गई, लेकिन सोने की बिक्री में गिरावट की आशंका से जेवरात व सराफा के अन्य आइटम बेचने वाली सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर भाव में गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक संकट के इस समय में विदेशी मुद्रा के भंडार को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों से एक साल के लिए सोने की खरीदारी टालने की अपील कर चुके हैं। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 72 अरब डॉलर के सोने के तो 12 अरब डॉलर के चांदी के आयात किए गए।
वित्त मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि सोना-चांदी व प्लेटिनम औद्योगिक उत्पादन की दृष्टि से कम महत्वपूर्ण है और इनकी खरीदारी से विदेशी मुद्रा भी अधिक खर्च होता है। बेवजह के आयात से संकट के इस समय में देश की व्यापक अर्थव्यवस्था पर विपरीत असर पड़ेगा। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार कम होने से रुपए पर भी दबाव बढ़ता है।
हालांकि मई के पहले सप्ताह में देश में 690 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा का भंडार था जो 11 माह के आयात के लिए पर्याप्त है। सोने के मुकाबले चांदी औद्योगिक सेक्टर के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। सोलर सेमीकंडक्टर व इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में चांदी का इस्तेमाल होता है। अब इस प्रकार के आइटम महंगे हो जाएंगे।
सराफा कारोबारियों का मानना है कि सोने के आयात पर शुल्क बढ़ाने से ज्वैलरी की खरीदारी और कम हो जाएगी। ज्वैलरी निर्माण से देश के लाखों कारीगर का परिवार चलता है। जानकार यह भी कह रहे हैं कि सोने के आयात शुल्क में इजाफा से सोने की स्मलिंग बढ़ जाएगी।
सराफा कारोबारियों ने बताया कि अभी 10 ग्राम के सोने के भाव में आयात शुल्क, कृषि विकास सेस और जीएसटी मिलाकर 14 हजार रुपए शामिल होते हैं जो अब 25 हजार को पार कर जाएगा।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, वैश्विक संकट के इस समय में सरकार का उद्देश्य घरेलू चीजों को बढ़ावा देना है। गैर जरूरी चीजों के आयात को हतोत्साहित करना और आवश्यक आइटम के आयात को प्राथमिकता देना है। देश की वृहद अर्थव्यवस्था की मजबूती को कायम रखने के लिए विदेशी खर्च को कम करने और ईंधन को बचाने पर जोर दिया जा रहा है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, सरकार के पास राजस्व की कोई कमी नहीं है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए पूंजीगत खर्च व अन्य सामाजिक विकास के मद में होने वाले खर्च में कोई कटौती नहीं होगी। सरकार के अन्य खर्च भी पहले की तरह जारी रहेंगे।
सरकार की तरफ से मुख्य रूप से सिर्फ उन उपायों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है जिससे ईंधन और विदेशी मुद्री की बचत हो।
इसे भी पढ़ें: छोटा काफिला बड़ा सदेश: पीएम मोदी के काफिले में 50% कटौती, गृह और रक्षा मंत्रियों ने भी कम की गाड़ियां

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News