अपराधिक केस खारिज, अमेरिकी कोर्ट के फैसले का गौतम अडानी ने किया स्वागत – AajTak

अमेरिकी अदालत ने गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज कर दिए हैं. अमेरिकी न्याय विभाग ने धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों को आगे न बढ़ाने का फैसला लिया है. अदालत ने ये भी स्पष्ट किया कि केस खारिज करने के बदले किसी प्रकार का कोई सौदा नहीं हुआ. अडानी ने इस फैसले का स्वागत किया और न्याय प्रक्रिया में विश्वास जताया.
ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गैराफिस ने संघीय अभियोजकों की मामला खारिज करने की अपील गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को खारिज कर दिया. हालांकि, जज ने न्याय विभाग से इस मामले को बंद करने की वजह भी पूछी थी. उन्होंने गौतम अडानी से भी ये स्पष्ट कराया कि क्या केस खत्म करने के बदले किसी तरह का कोई वादा किया गया था. इसके बाद ही अदालत ने औपचारिक रूप से मामला खारिज किया.
गौतम अडानी ने फैसले का किया स्वागत

अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए गौतम अडानी ने कहा कि वह अमेरिकी अदालत के इस फैसला का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा कि इस कठिन समय के दौरान सत्य, निष्पक्षता और कानून के शासन में उनका विश्वास हमेशा बना रहा. अडानी ने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उन पर और भारत की न्याय क्षमता पर भरोसा बनाए रखा.
I welcome the US court’s decision with humility and deep respect for the judicial process.

Throughout this challenging period, our faith in truth, fairness and the rule of law remained unwavering.

My deepest gratitude to those who never lost faith in us, in the system and in…

अडानी पर लगे थे गंभीर आरोप
दरअसल, गौतम अडानी पर साल 2024 में सोलर एनर्जी प्लांट की मंजूरी पाने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने और अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों के बारे में गुमराह करने के आरोप लगाए गए थे. अडानी समूह ने शुरुआत से ही इन आरोपों को गलत बताते हुए किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया था. गौतम अडानी इन आरोपों का जवाब देने के लिए कभी अमेरिकी अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए थे.
ट्रंप के कार्यकाल का असर

न्याय विभाग ने 18 मई को घोषणा की थी कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाएगा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान हाई-प्रोफाइल मामलों को छोड़ने की ये एक और मिसाल है. न्याय विभाग के अधिकारी ट्रेंट मैककॉटर ने कोर्ट फाइलिंग में बताया कि ये मामला मुख्य रूप से विदेशी था, इसे साबित करना कठिन था और ये विभाग की वर्तमान प्राथमिकताओं के अनुकूल नहीं था.

वहीं, अदालत द्वारा पूछे जाने पर न्याय विभाग और अडानी के वकीलों ने स्पष्ट किया कि केस खारिज करने के बदले किसी भी तरह के लेन-देन या सौदेबाजी का कोई समझौता नहीं हुआ था. 15 जुलाई को दाखिल अपने शपथ पत्र में अडानी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अमेरिका में 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था, लेकिन केस खत्म करने के बदले किसी समझौते की उन्हें जानकारी नहीं है.
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