शिकायतकर्ता का आरोप है कि कांग्रेस नेता ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल पर हुए एक धार्मिक अनुष्ठान को जातिगत रंग दिया.
दीपक मंडल
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उत्तराखंड के हल्द्वानी में वाल्मीकि समुदाय के एक सदस्य की शिकायत के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.
शिकायतकर्ता का आरोप है कि कांग्रेस नेता ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल पर हुए एक धार्मिक अनुष्ठान को जातिगत रंग दिया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ पुलिस ने बताया कि एफ़आईआर भारतीय न्याय संहिता की उन विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है, जो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित हैं.
पुलिस के मुताबिक़, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराएं भी लगाई गई हैं.
पीटीआई के मुताबिक़ जवाहर नगर निवासी और श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सदस्य अमित कुमार ने हल्द्वानी थाने में शिकायत दर्ज कराई है.
उन्होंने दावा किया कि वह उस "धार्मिक अनुष्ठान और साफ़-सफाई अभियान" के दौरान मौके पर मौजूद थे.
अमित कुमार के मुताबिक़, 29 अगस्त को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी की टिप्पणियों से समुदाय की भावनाएं आहत हुईं.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि मल्लिकार्जुन खड़गे की सभा के बाद रामलीला मैदान का शुद्धीकरण किया गया, 'क्योंकि खड़गे दलित हैं.'
राहुल गांधी ने इस मामले में फ़ौरन एफ़आईआर दर्ज करने की मांग की थी.
राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था, "आठ अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की हल्द्वानी में रैली होती है और 10 अगस्त को बीजेपी-आरएसएस के लोग उनके मंच का शुद्धीकरण करते हैं."
इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने के बाद यह मामला फिर से गर्म हो गया है और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर सफ़ाई दी है.
इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में राहुल गांधी की ओर से लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा था, "जिन्होंने भी वहां पर शुद्धीकरण किया था, उनमें बीजेपी का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था."
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अमेरिकी सेना ने ईरान के लाराक द्वीप पर दो ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है.
अमेरिका के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.
जुलाई के बाद ईरान पर अमेरिका का यह पहला ज्ञात हमला है.
बीबीसी के अमेरिकी पार्टनर सीबीएस न्यूज़ ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कमांडर टिम हॉकिन्स के हवाले से बताया, "ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को होर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंगों के साथ रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी करते देखा गया था."
आईआरजीसी ने कहा कि रविवार के हमले में कई लोग मारे गए और घायल हुए हैं.
उसने इस हमले के जवाब में "जवाबी कार्रवाई और सजा" देने की धमकी दी.
इसके बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने ख़बर दी कि आईआरजीसी ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला किया है.
बीबीसी ने इस बारे में अमेरिकी सेंट्रल कमांड से प्रतिक्रिया मांगी है.
आईआरजीसी के इस बयान के कुछ ही देर बाद जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसने आठ मिसाइलों को गिराया है.
जॉर्डन की सशस्त्र सेनाओं ने एक बयान में कहा, "आज सोमवार तड़के वायु रक्षा प्रणालियों ने आठ मिसाइलों को रोक दिया, जिन्होंने जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया था."
सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा ने सेना के प्रवक्ता के हवाले से यह जानकारी दी.
जुलाई के अंत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान रोकने का एलान किया था, उसके बाद ईरान पर अमेरिका का यह पहला ज्ञात हमला है.
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