ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया कि अमेरिका ने धमकी और रिश्वत के बावजूद ईरान को झुका नहीं पाया, जिसके बाद 12 दिन की जंग में अमेरिका को …और पढ़ें
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची।
अमेरिका ने ईरान से यूरेनियम को ‘जीरो’ करने की शर्त रखी थी।
ईरान ने अमेरिकी धमकियों और रिश्वत के प्रस्तावों को ठुकराया।
पूर्व सर्वोच्च नेता खामेनेई के आवास पर बमबारी सुरक्षा चूक थी।
डिजिटल डेस्क, तेहरान। पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी जंह और अमेरिका के साथ हुई पर्दे के पीछे की बातचीत को लेकर एक साथ कई सारे चौंकाने वाले दावे किए हैं। ‘मेहर न्यूज’ को दिए इंटरव्यू में अराघटी ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान न तो अमेरिका की धमकियों से डरता है और न ही उसके किसी लालच में आने वाला है।
अब्बास अराघची ने बताया कि 12 दिनों तक चली जंग से पहले अमेरिका ने बातचीत के दौरान एक नाजायज शर्त रखी थी। अमेरिका चाहता था कि ईरान अपने यूरेनियम को बढ़ाने का काम पूरी तरह से बंद कर दे यानी इसे ‘जीरो’ पर ले आए।
अराघची ने कहा कि अमेरिका की यह मांग पूरी तरह से गैर-कानूनी और बेतुकी थी। हमने इसका कड़ा विरोध किया और अपनी बात पर अड़े रहे। जब अमेरिका को समझ आ गया कि वह बातचीत की टेबल पर अपनी जिद पूरी नहीं करवा सकता, तो उन्होंने युद्ध का रास्ता चुना। लेकिन इस 12 दिनों की जंग में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
इंटरव्यू में अराघची ने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ हुई अपनी तीखी बहस का एक हिस्सा भी साझा किया। उन्होंने अमेरिकी दूत से कहा था कि क्या आप कभी ऐसी मीटिंग में बैठे हैं जहां आपको लगे कि अगले ही पल वहां बम गिर सकता है? अराघची ने बताया कि इस बात पर अमेरिकी अधिकारी बस मुझे चुपचाप देखते रह गए।
अराघची ने इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने विटकॉफ से सवाल किया था कि क्या आपने कभी फोन पर बात करते हुए यह सोचा है कि अगले ही सेकंड आपका फोन ब्लास्ट हो सकता है? क्या कभी परिवार का हालचाल लेते हुए लगा है कि यह उनसे आखिरी बात हो सकती है? हम इन हालातों से गुजर चुके हैं और मजबूती से खड़े रहे हैं।
अराघची के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान को झुकने के बदले वहां बिजली घर और बुनियादी ढांचा बनाने का लालच दिया था। इस पर अराघची ने कहा कि हम न तो धमकी से डरते हैं और न ही रिश्वत लेते हैं। आप सिर्फ उसे डरा सकते हैं जो मौत से डरता हो। हम तो हर पल किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहते हैं।
इस दौरान उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई पर तंज कसते हुए कहा कि यह वेनेजुएला नहीं है, जहां आप 3 जनवरी के ऑपरेशन की तरह राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर सीधे न्यूयॉर्क मुकदमे के लिए ले गए और बाकी सब डर कर पीछे हट गए। ईरान में ऐसा नहीं होगा।
इसके अलावा ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक डॉक्यूमेंट्री इंटरव्यू में बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने माना है कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के आवास पर जो बमबारी हुई थी, जिसमें उनकी मौत हो गई, वह ईरान की सुरक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़े ‘सुराख’ की वजह से हुई थी। हैरान करने वाली बात यह है कि अराघची के मुताबिक, यह सुरक्षा चूक आज भी बनी हुई है।
अराघची ने बताया कि इस सुरक्षा चूक का फायदा उठाकर अमेरिका और इजरायल ने न सिर्फ ईरान की खुफिया जानकारियां चुराईं, बल्कि वे ईरान के बड़े फैसलों और लोगों की सोच को भी प्रभावित कर रहे हैं। दुश्मन को ईरान के शीर्ष नेताओं की हर मीटिंग की भनक पहले से थी। सुरक्षा एजेंसियां अभी भी इस चूक का पता लगाने में जुटी हैं।