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लोकसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि नक्सलवाद अपने निर्णायक अंत की ओर बढ़ रहा है. गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि 2019 से अब तक सुरक्षा बलों ने 29 शीर्ष नक्सली नेताओं को ढेर किया है. इनमें सिर्फ 2025 में ही 14 सेंट्रल कमेटी मेंबर (CCM) और पोलित ब्यूरो मेंबर (PBM) मारे गए, जो CPI (एम) संगठन को सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है.
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि 2014 में 10 राज्यों में नक्सल गतिविधियां थीं, जो 2025 (अक्टूबर तक) घटकर केवल 5 रह गईं. सबसे अहम बदलाव प्रभावित जिलों में दर्ज किया गया, जहां 2018 के 126 जिलों की तुलना में अक्टूबर 2025 तक केवल 11 जिले ही नक्सल समस्या से जूझ रहे हैं. इनमें से सिर्फ तीन जिले “सबसे अधिक प्रभावित” श्रेणी में आते हैं.
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नित्यानंद राय ने कहा कि नक्सलियों के फिर से पैर जमाने की कोशिश को रोकने के लिए 27 जिलों को सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना में “लिगेसी एंड ट्रस्ट डिस्ट्रिक्ट्स” के रूप में शामिल किया गया है. नित्यानंद राय ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के नेतृत्व में नक्सलवाद मार्च 2026 तक समाप्त कर दिया जाएगा.
नक्सल हिंसा में 81% की गिरावट
सरकार के अनुसार, 2010 में नक्सल हिंसा अपने चरम पर थी, लेकिन 2024 तक इसमें 81% की गिरावट दर्ज की गई. 2004 से 2014 के बीच नक्सल हिंसा में 6,508 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 2015 से 2025 (मई तक) यह संख्या घटकर 1,868 रह गई-यानी 71% कमी. इस वर्ष मई से नवंबर के बीच केवल 44 मौतें दर्ज की गईं. नित्यानंद राय के मुताबिक, “नक्सलियों की सुरक्षा बलों से लड़ने की क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है.”
नक्सलियों को किया जा रहा प्रोत्साहित
सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए सरकार ने वित्तीय सहायता भी बढ़ाई है. सीनियर कैडर को 5 लाख, अन्य कैडर को 2.5 लाख, हथियार के साथ सरेंडर पर अतिरिक्त प्रोत्साहन, और तीन साल तक 10,000 रुपये मासिक भत्ता दिया जाता है.
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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा ढांचे को बढ़ाने के साथ-साथ स्कूल, ITI, कौशल केंद्र, बैंक और ATM भी स्थापित किए गए हैं. 2015 में शुरू की गई “Whole of Government Approach” के तहत अब 574 CAPF कंपनियां इन क्षेत्रों में तैनात हैं. राय ने कहा कि नक्सली न संविधान में विश्वास रखते हैं, न लोकतंत्र में, और वर्षों से हजारों निर्दोष लोगों की हत्या कर चुके हैं लेकिन अब “रेड कॉरिडोर” काफी सिमट चुका है और नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है.
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