आज का एक्सप्लेनर: चीन में दुनिया की सबसे बड़ी सोने की खदान मिली, भारत-अमेरिका के लिए टेंशन क्यों; वो सबकुछ … – Dainik Bhaskar

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी, मैन्युफैक्चरिंग में माहिर और एक्सपोर्ट के बादशाह चीन को अब दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड माइन भी मिल गई है। मध्य चीन में मिली खदान में 1 हजार मीट्रिक टन से भी ज्यादा सोना निकल सकता है, जिसकी कीमत 83 बिलियन डॉलर यानी करी
सवाल 1: चीन में कैसे खोजी इतनी बड़ी सोने की खदान? जवाब: चीन के हुनान प्रांत के जियोलॉजिकल ब्यूरो ने पिंगजियांग काउंटी में सोने की 40 वीन्स खोजी है। जो जमीन के 2 किलोमीटर नीचे मौजूद है। वैज्ञानिकों ने बताया कि यह सोना हाई क्वालिटी का है। इसी जगह पर 3 हजार मीटर की खुदाई करने पर 1 हजार टन से ज्यादा सोना मिल सकता है। इसकी कीमत 83 बिलियन डॉलर यानी करीब 7 लाख करोड़ रुपए है।
28 नवंबर को सोने की खोज पर चीनी वैज्ञानिक चेन रुलिन ने कहा,
हमने कई चट्टानों के नीचे ड्रिल किए। चट्टानों के कोर में सोना दिखाई दिया है। 2 हजार मीटर की रेंज में 1 टन चट्टान से 138 ग्राम सोना मिल सकता है।
हुनान जियोलॉजिकल ब्यूरो के उप प्रमुख लियू योंगजुन ने बताया कि ‘3D जियोलॉजिकल मॉडलिंग टेक्नोलॉजी से सोने की खोज की गई। इसके लिए साइट के आसपास के इलाकों में ड्रिलिंग की गई।’
3D जियोलॉजिकल मॉडलिंग का इस्तेमाल जमीन के नीचे मौजूद खनिजों को ढूंढने के लिए किया जाता है। क्योंकि सोना जमीन के अंदर वीन्स यानी नसों के रूप में मौजूद होता है। आसान भाषा में समझें तो जमीन के अंदर सोने की परतें होती हैं। जहां खुदाई करके सोना निकाला जाता है।
इस प्रोसेस में खुदाई के साथ सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल भी किया जाता है। सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों को 3D मॉडल में बदला जाता है। इसके लिए एडवांस्ड सॉफ्टवेयर और नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। यह मॉडलिंग पारंपरिक जियोलॉजिकल सर्वेक्षणों की तुलना में बेहद आसान होती है।
सवाल 2: इतना सोना मिलने से चीन की इकोनॉमी पर क्या असर पडे़गा? जवाब: चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी है। इसके बावजूद चीन की इकोनॉमी कोविड के 2 साल बाद भी लगातार संघर्ष कर रही है। 2024 की पहले तीन क्वार्टर में चीन की इकोनॉमी 4.8% रही। यह 5% के लक्ष्य से थोड़ा कम है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन में सोने की खदान मिलने से इकोनॉमी में तेजी आने की उम्मीद है। क्योंकि चीन दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड प्रोड्यूसर भी है। 2023 में वैश्विक उत्पादन में इसका हिस्सा लगभग 10% था। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के पास 2,264 मीट्रिक टन गोल्ड रिजर्व है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी देश की करेंसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर होती है, तो सोने का भंडार उस देश की आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने में मदद करता है। उदाहरण से समझें, 1991 में जब भारत की इकोनॉमी डूब रही थी, सामान इम्पोर्ट करने तक के लिए डॉलर नहीं थे। ऐसे में भारत ने सोने को गिरवी रखकर पैसे जुटाए और फाइनेंशियल क्राइसिस से बाहर निकला।
सवाल 3: क्या अमेरिका को पीछे छोड़ चीन दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बनेगा? जवाब: विदेशी मामलों के जानकार और जेएनयू में प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक, सेंट्रल बैंक ऑफ चाइना ने अमेरिका के पेमेंट सिस्टम SWIFT की तरह CIPS नाम का सिस्टम बनाया है। इस पेमेंट सिस्टम से करीब 117 देशों के 1551 बैंक जुड़ चुके हैं। पिछले साल इस सिस्टम के जरिए 123 ट्रिलियन युआन (चीन की करेंसी) से ज्यादा का ट्रांजैक्शन हुआ था।
चीन युआन रिजर्व को बढ़ावा देने के लिए 40 से ज्यादा देशों के साथ करेंसी स्वैप एग्रीमेंट भी कर चुका है। इस एग्रीमेंट के तहत 2 देशों को व्यापार करने के लिए हर बार SWIFT सिस्टम की जरूरत नहीं होती है। एक फिक्स अमाउंट का ट्रेड वो देश अपनी करेंसी में कर सकते हैं। राजन कुमार के मुताबिक,
सोने का बहुत ज्यादा भंडार होना देश की इकोनॉमी को मजबूत बनाता है। इससे यह भी पता चलता है कि वह देश अपने धन का अच्छी तरह से प्रबंधन करता है। ऐसे में अन्य देश और ग्लोबल फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन्स उस देश पर ज्यादा भरोसा करते हैं। आसान भाषा में कहें तो गोल्ड रिजर्व किसी भी देश की करेंसी वैल्यू का सपोर्ट करने के लिए एक सॉलिड एसेट है।
इस समय अमेरिका 29 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया की सबसे इकोनॉमी है। क्योंकि अमेरिका भी सोने के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बना था। 1848 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में ‘गोल्ड रश’ आया था। तब अमेरिकी नदी के पास सोने की खोज हुई थी। 1855 तक यहां से 3.40 लाख किलोग्राम सोना निकाला गया था।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 3.89 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी के साथ 5वें नंबर पर है। विदेशी फंडिंग और नए व्यापार समझौतों की वजह से भारत की इकोनॉमी बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले सालों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन सकता है।
सवाल 4: क्या चीन में इतना सोना मिलने से अमेरिकी डॉलर का वर्चस्व कम होगा? जवाब: प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक, चीन पहले ही चाइनीज युआन को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में मजबूत करेंसी बनाने की कोशिशें कर रहा है। अब चीन में सोने की खदान मिलने से युआन की वैल्यू बढ़ जाएगी। इससे डी-डॉलराइजेशन की प्रक्रिया भी तेज हो जाएगी।
युआन की वैल्यू बढ़ाने के लिए नवंबर 2023 में चीन ने सऊदी अरब के साथ एग्रीमेंट भी किया था। इसमें तीन साल के लिए डॉलर की बजाय युआन का इस्तेमाल कर करेंसी स्वैप करने की डील हुई। इस एग्रीमेंट की वैल्यू करीब 6.93 बिलियन डॉलर है।
अभी दुनियाभर में अमेरिकी डॉलर में व्यापार किया जाता है। क्योंकि 1944 में दुनिया के 44 देशों के डेलीगेट्स ने मिलकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सभी करेंसी का एक्सचेंज रेट तय किया। उस समय अमेरिका के पास सबसे ज्यादा सोने का भंडार था और वो दुनिया की सबसे बड़ी और स्थिर अर्थव्यवस्था बन चुका था।
जेपी मॉर्गन में स्ट्रैटजिक रिसर्चर एलेक्जेंडर वाइस कहते हैं,
डी-डॉलराइजेशन से अमेरिकी बाजारों में डिसइन्वेस्टमेंट और भरोसे में गिरावट हो सकती है, जिससे मुनाफा घटेगा। साथ ही इंटरनेशनल रिजर्व में डॉलर में कमी आएगी या दूसरी करेंसी में ज्यादा रिजर्व रखा जाएगा।
सवाल 5: चीन में सोना मिलने से भारत पर क्या असर पड़ेगा? जवाब: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन में सोने की खदान का मिलना भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। 3 पाइंट्स…
1. पड़ोसी देश चीन की तरफ झुक जाएंगे चीन सोने के जरिए पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी देशों को फंडिंग कर सकता है। यह देश भारत की जगह चीन पर ज्यादा भरोसा करने लगेंगे। इससे भारत पर निर्भरता कम होने लगेगी। इन देशों पर चीन का क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ेगा।
इसका सीधा असर भारत की ‘सॉफ्ट पॉवर’ पर पडे़गा। क्योंकि भारत इन एशियाई देंशों को हर साल फंड देता है। इससे भारत के एशियाई देशों के साथ संबंध मजबूत होते हैं। भारत का इन देशों के साथ व्यापार बढ़ जाता है। इसके साथ ही भारत को सैन्य सहायता भी मिलती है।
2. चीन की फंडिंग से भारत की इकोनॉमी प्रभावित एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चीन की आर्थिक मदद से एशियाई देशों के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते बिगड़ सकते हैं। चीन एशियाई देशों को कम ब्याज पर ज्यादा उधार भी दे सकता है। एशियाई देश भारत की जगह चीन के साथ व्यापार बढ़ा देंगे। इससे भारत की इकोनॉमी खतरे में पड़ जाएगी।
आसान भाषा में कहें तो, चीन सस्ती चीजों और कम ब्याज पर उधार देने लगेगा। तो एशियाई देश भारत की जगह चीन के साथ व्यापार करेंगे। इससे भारत की आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाएगी।
3. एशियाई देशों से सैन्य रिश्ते कमजोर एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन एशियाई देशों के साथ सैन्य रिश्ते मजबूत कर लेगा। इनमें ऐसे देश भी शामिल हैं, जो भारत के इर्द-गिर्द मौजूद हैं। भारत को सीमा सुरक्षा पर भी चुनौतियां मिलने लगेंगी। जो भारत को सैन्य सुरक्षा बल देने वाले देश विरोध में भी उतर सकते हैं।
उदाहरण के लिए- ‘चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा’ और ‘वन बेल्ट, वन रोड’ जैसी परियोजनाओं का विस्तार हो सकता है। इससे पड़ोसी देशों की चीन के साथ नेटवर्किंग बढ़ जाएगी। चीन बीते कुछ सालों से इन योजनाओं का विस्तार कर रहा है। अब सोना मिलने के बाद इन पर तेजी से काम हो सकेगा।
सवाल 6: भारत में कितना सोना और किस रूप में मौजूद? जवाब: RBI की सिंतबर 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास 854 मीट्रिक टन सोना है। इसमें से RBI के पास 510 मीट्रिक टन सोना मौजूद है। बाकी का सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) और स्विट्जरलैंड के बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) में रखा है। जरूरत पड़ने पर भारत इन बैंकों से सोना वापस ले लेता है। अक्टूबर 2024 में भारत ने इंग्लैंड के बैंक से 100 टन सोना वापस मंगाया था।
2023 की वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय महिलाओं के पास 25 हजार टन से ज्यादा सोना गहने और अन्य रूप में मौजूद है। यह दुनिया में सबसे ज्यादा है।
सवाल 7: चीन की तरह भारत भी जमीन के नीचे दबा सोना क्यों नहीं निकाल लेता? जवाब: भारतीय भूतत्व सर्वेक्षण (GSI) और भारतीय खनन विभाग के मुताबिक, भारत में भूवैज्ञानिकों ने सिर्फ 10% जमीन की रिसर्च की है। रिसर्च के मुताबिक, जमीन के नीचे लगभग 2 हजार मीट्रिक टन सोने का भंडार हो सकता है। यह दुनिया के किसी भी अन्य देश के मुकाबले बहुत ज्यादा है।
भारत में कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से सोने का खनन होता है। इसके बावजूद सरकार ज्यादा सोना निकालने में नाकाम रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे 4 बड़ी वजहें हैं…
1. बजट और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की कमी: भारत सरकार के सालाना बजट में रिसर्च को बहुत कम पैसा मिलता है। ज्यादातर पैसा सरकारी योजनाओं को पूरा करने में खत्म कर दिया जाता है। सोने के खनन के लिए एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की जरूरत होती है, जो भारत के पास नहीं हैं। खनन करने के इक्विपमेंट्स और रिसर्च प्रोसेस काफी महंगी होती है।
2. ज्यादा लागत और फायदा कम: जमीन के नीचे सोने के खनन में बहुत ज्यादा लागत आती है। भारत में खनन कंपनियों को इस सोने के भंडार से उतने फायदे की उम्मीद नहीं होती जितनी लागत लगती है।
3. सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दे: सोने के खनन की प्रक्रिया में पर्यावरणीय नुकसान हो सकते हैं। खनन से प्रदूषण, जल स्रोतों का नुकसान और वन्य जीवन पर बुरा असर हो सकता है। इसके अलावा, खनन वाली जगह पर रह रहे लोग भी अक्सर खनन का विरोध करते हैं। जिससे सरकार और कंपनियों के लिए इन परियोजनाओं को लागू करना मुश्किल हो जाता है।
4. कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां: भारत में खनन के लिए सख्त कानूनी प्रक्रियाएं बनाई गई हैं। देश में कहीं भी खनन करने के लिए कई जगह से अनुमति लेनी पड़ती है। इस वजह से खनन करने का प्रोजेक्ट सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह जाता है।
सवाल 8: दुनियाभर में किन देशों के पास कितना सोना? जवाब: 2024 में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे ज्यादा 8 हजार टन सोना अमेरिका के पास है। चीन 2,264 टन सोने के साथ 6वें नंबर है। भारत के पास 840 टन सोना है और वो 9वें नंबर पर है।
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रिसर्च सहयोग- अनमोल शर्मा
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