नई दिल्ली. चीन के विदेश मंत्री वांग यी की नई दिल्ली यात्रा से पहले, चीन ने कहा कि वह भारत के साथ हाईलेवल बातचीत को बनाए रखने के अलावा उससे राजनीतिक पारस्परिक विश्वास को बढ़ाना चाहता है. वांग अपनी दो दिवसीय यात्रा पर सोमवार को नई दिल्ली पहुंचे, जो शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की चीन की तय यात्रा से कुछ हफ़्ते पहले है. वे यहां विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे. वांग यी 19 अगस्त को पीएम मोदी से भी मिलेंगे.
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि वांग की यात्रा के माध्यम से चीन भारत के साथ मिलकर काम करने की उम्मीद करता है, ताकि नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण आम सहमति को अमली जामा पहनाया जा सके. इसके तहत उच्च स्तरीय आदान-प्रदान को कायम रखना, राजनीतिक विश्वास को बढ़ाना, व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा, मतभेदों को उचित तरीके से निपटाया जाना और चीन-भारत संबंधों के स्थिर विकास को बढ़ावा दिया जाना है.
माओ ने सोमवार को बीजिंग में प्रेस वार्ता के दौरान वांग की यात्रा पर टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत-चीन सीमा मुद्दों पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता दोनों देशों के बीच सीमा वार्ता के लिए एक उच्च स्तरीय माध्यम है. उन्होंने कहा कि बीजिंग में 23वें दौर की वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने परिसीमन, वार्ता, सीमा प्रबंधन तंत्र, सीमा पार आदान-प्रदान और सहयोग पर कई आम सहमतियां हासिल कीं. उन्होंने कहा कि इस वर्ष की शुरुआत से ही दोनों पक्षों ने राजनयिक माध्यमों से संवाद बनाए रखा है तथा उन परिणामों के कार्यान्वयन को सक्रियता से आगे बढ़ाया है.
उन्होंने कहा कि आगामी वार्ता के लिए चीन मौजूदा आम सहमति के आधार पर और सकारात्मक एवं रचनात्मक रुख के साथ संबंधित मुद्दों पर भारत के साथ गहन संवाद जारी रखने और सीमावर्ती क्षेत्रों में निरंतर शांति बनाए रखने के लिए तैयार है. सीमा वार्ता में हुई प्रगति और चीन द्वारा समझौते की संभावनाओं को किस प्रकार देखा जाता है, इस प्रश्न पर माओ ने कहा कि विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता सीमा मुद्दे पर दोनों पक्षों के लिए एक रचनात्मक और सकारात्मक तंत्र है. उन्होंने कहा कि 23वें दौर की वार्ता में कई महत्वपूर्ण सहमतियां बनीं और दोनों पक्ष इन सहमतियों को लागू कर रहे हैं.