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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. ममता बनर्जी ने कहा कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन अगर कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वह इस समय धरने पर बैठी हैं और जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी.
ममता बनर्जी ने कहा कि उस कार्यक्रम के आयोजकों, फंडिंग या आयोजन को लेकर राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी. उन्होंने कहा कि जब भी राष्ट्रपति राज्य में आती हैं या जाती हैं तो इसकी सूचना मिलती है, लेकिन संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी और न ही राज्य सरकार उस कार्यक्रम का हिस्सा थी.
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राष्ट्रपति पर भाजपा एजेंडा चलाने का आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति पर हमला करते हुए कहा कि उन्हें यह कहते हुए शर्म आ रही है कि राष्ट्रपति को भाजपा के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भेजा गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति भाजपा की नीतियों के जाल में फंस गई हैं. ममता ने कहा कि भाजपा की प्राथमिकता राजनीति है, जबकि उनकी प्राथमिकता जनता है.
उन्होंने राष्ट्रपति से सवाल करते हुए कहा कि जब मणिपुर में आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे थे तब राष्ट्रपति क्यों चुप थीं? ममता बनर्जी ने यह भी पूछा कि राजस्थान और महाराष्ट्र में आदिवासियों के साथ कथित अत्याचार के मामलों में राष्ट्रपति ने सवाल क्यों नहीं उठाए.
चुनाव से पहले राजनीति न करने की नसीहत
ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति से कहा कि चुनाव से पहले उनके साथ राजनीति न की जाए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसी कार्यक्रम को रोकने की कोशिश नहीं की थी और न ही उस आयोजन से उनका कोई संबंध था.
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार की प्राथमिकता राज्य के लोगों की भलाई है. उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीति को प्राथमिकता देती है, जबकि उनकी सरकार जनता के हितों को सबसे ऊपर रखती है.
प्रोटोकॉल का पालन नहीं किए जाने पर राष्ट्रपति ने जताई थी नाराजगी
बता दें कि 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पश्चिम बंगाल पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छोटे कार्यक्रम स्थल को लेकर नाराज़गी जताई थी. साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस बात पर भी दुख व्यक्त किया था कि निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें स्वागत करने के लिए मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री मौजूद नहीं था. उन्होंने कहा कि उन्हें इससे व्यक्तिगत रूप से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन देश के राष्ट्रपति के लिए तय किए गए प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए.
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