इंडस्ट्री में बने रहना नहीं आसान, बोलीं प्रोड्यूसर अनु रंजन, नेपोट‍िज्म-साउथ की सक्सेस पर कही खास बात – Aaj Tak

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आईटीए की फाउंडर और फिल्म प्रोड्यूसर अनु रंजन, एजेंडा आजतक 2024 का हिस्सा बनीं. उन्होंने आजतक के साथ बातचीत में बॉलीवुड, नेपोटिज्म, सोशल मीडिया और ‘पुष्पा 2’ एक्टर अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी पर अपने विचार भी रखे.
ITA अवॉर्ड फंक्शन ऑर्गेनाइज करने को लेकर अनु रंजन ने बताया कि एक अवॉर्ड शो को ऑर्गेनाइज आसान नहीं होता है. अनु ने कहा- ‘मैं नहीं चुनती कि किसे अवॉर्ड मिलेगा और किसे नहीं. इसके ल‍िए ज्यूरी बैठती है. दूसरी बात जो जरूरी है वो हैं वोट. ऑनलाइन वोट आते हैं. अब तो करोड़ों तक आते हैं. पहले कम थे, लेकिन पिछले तीन-चार साल से एक करोड़-डेढ़ करोड़, सवा करोड़ आते हैं. जनता निर्णय करती है कि पॉपुलर ये हैं. ज्यूरी और पॉपुलर हमारी दो कैटेगरी हैं. उसी हिसाब से वोटिंग होती है.’
इंडस्ट्री में टिकना है मुश्किल? 
उनसे पूछा गया कि फिल्म इंडस्ट्री में सारे सितारों को आप जानते हैं, क्या मुश्किल होता है ये कहना कौन अच्छा है, कौन बुरा? कभी आप लोगों को सलाह देती हैं कि आपने यहां ये बड़ी गलती कर दी थी? 
अनु रंजन ने कहा, ‘असल में ऐसा नहीं कर सकते है. हम किसी को सलाह दे ही नहीं सकते हैं. क्योंकि उन्होंने अपना बेस्ट दिया है. सबसे बड़ी बात कि क्या चलता है, सही में किसी को नहीं पता. आप सोचते हैं ये पिक्चर तो खास नहीं बनी है, वो करोड़ों कमा लेती है. जो सोचते हैं कि क्या कमाल बनी है, उसे कोई देखने ही नहीं गया. फ‍िल्म को सफल बनाने का तो फॉर्मूला कोई क्रैक कर दे न, तो बहुत बड़ी बात है.’
साउथ की सक्सेस पर क्या कहा? 
साउथ की इंडस्ट्री ने ये फॉर्मूला बड़ी अच्छी तरह से क्रैक किया गया है. इसपर अनु ने कहा, ‘साउथ की इंडस्ट्री में साउथ का फॉर्मूला ही था. अब हिंदी इंडस्ट्री उसको देख रही है. साउथ की पिक्चरें कब से चल रही हैं. तमिल, तेलुगू, कन्नड़, मलयालम, बेहतरीन फिल्में. हिंदी बेल्ट इसे नहीं देखती थी. अब वो लोग इसे देख रहे हैं. तो इसलिए साउथ के पास अपनी भाषाओं के साथ हिंदी का भी फायदा है.’
बाहर के लोगों को लगता है कि इंडस्ट्री में जाना, लोगों के दिलों पर राज करना, छा जाना बड़ी आसान बात है. बाहर के लोगों को बताइए कि क्या है, क्या करना चाहिए?
अनु ने कहा, ‘बहुत मुश्किल है, मैं आपको बता देती हूं, लेकिन एक बार आप घुस गए, वहां से भी आपकी मुश्किलें खत्म नहीं होतीं. वो अंत तक चलती रहती हैं. हर फिल्म की किस्मत अलग है. हर हफ्ते आप बेहतर करने की कोशिश करते हैं, बेहतर बनने की कोशिश करते हैं. तो इसमें… ये इंडस्ट्री मुश्किल है, लगती बड़े प्यार से है. आप सुनोगे कहानियां 9 साल का स्ट्रगल, 12 साल स्ट्रगल, 15 साल स्ट्रगल, फिर आपको एक हिट आती है. फिर आदमी भूल जाता है न कि आप किससे गुजरे थे. तो ये मुश्किल इंडस्ट्री है. पहली चीज को इसमें घुसना, और एक बार जब आप आ गए हैं तो उसमें टिके रहना.’
नेपोटिज्म पर बोलीं अनु रंजन 
नेपोटिज्म को लेकर भी अनु रंजन ने बात की. उन्होंने कहा, ‘देखिए अभी हम पॉलिटिकल वातावरण में हैं. सारे ही आकर मुझसे मिल रहे हैं कि ये मेरा बेटा है, ये मेरी बेटी है, ये मेरा भी है. मेरे पिता ने कहा तुम आओ, मेरी मां ने कहा तुम करो. तो नेपोटिज्म क्या? इंडस्ट्रियलिस्ट हैं. बड़े हो या छोटे, कंपनी में मेरा बेटा इसे चलाएगा. कुछ आता नहीं है. पढ़ाई करके, दो साल पढ़ाई और चलो जी तुम कंपनी संभालो. तो नेपोटिज्म, ये शब्द खाली इंडस्ट्री में है क्योंकि ये दिखता इतना बड़ा है. लेकिन ये हर इंडस्ट्री में है. अगर मेरे पास भी मेरा बिजनेस है तो सबसे पहले मैं सोचूंगी मेरे बच्चे इसे संभालें, न कि बाहर का कोई. तो आप उसे नेपोटिज्म कहोगे या क्या कहोगे मुझे नहीं पता. खास बात ये भी है कि नेपोटिज्म में आप कह रहे हो कि मेरा बेटा आएगा. बहुत लोगों के बेटे ये हैं, उन्होंने अच्छा नहीं किया तो जनता ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया. जो आए और चले, आप बोल रहे हैं नेपोटिज्म.’
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सोशल मीडिया से है दिक्कत
इंडस्ट्री ग्लैमरस है, बहुत सुंदर दिखती है. मेंटल हेल्थ ऐसी जगहों पर बहुत जरूरी होती है. सब्र चाहिए. आप क्या सलाह देना चाहेंगी? अनु रंजन ने कहा, ‘बहुत मुश्किल है. यही वक्त है जब आपको परिवार की जरूरत पड़ती है. सटेक्स हाई हैं तो स्ट्रेस लेवल भी हाई होता है. जनता के लिए सोशल मीडिया पर गाली देना एक सेकेंड की बात है. वो बोलेंगे ‘अरे बकवास है’. सबको लगता है एक-एक करके. जब ये चीजें नहीं होती थीं तब लोग मेंटल हेल्थ की बात ही नहीं करते थे.’
क्या सोशल मीडिया की वजह से मुश्किलें बढ़ गई हैं?
अनु ने कहा, ‘बढ़ गई हैं. 1000 प्रतिशत, सोशल मीडिया इसका जिम्मेदार है. वो आपको देता इतना बड़ा है, पर आपसे लेता भी इतना बड़ा है. मुझे नहीं लगता है, मुझे लगता है देता है कम और लेता है ज्यादा. बच्चे जो घर में बैठे हैं, फोन पर देखते हैं- ये ये कर रही है, वो खा रही है, वो पहन रही है, मैं क्यों नहीं. जब मैं क्यों नहीं आता है, तो आपको पछतावा होने लगता है.’
अल्लू अर्जुन की ग‍िरफ्तारी पर बोलीं अनु रंजन, पूरी फ‍िल्म की टीम को उठाओ…  
अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी पर भी उन्होंने बात की. अनु रंजन ने कहा, ‘बेचारा. देखिए उसका कसूर नहीं था कि हाल में ये हुआ है. सिक्योरिटी बेहतर हो सकती थी. पुराने भी थिएटर में मुझे याद है, उपहार ट्रैजडी थी. आपने किसको पकड़ा था तब? आपने नए एक्टर्स को पकड़ा था. नई एक्ट्रेस को, नए प्रोड्यूसर को. और वहां को मौत भी हुई थी. मेरे दोस्त, मेरे स्कूल की दोस्त की बहन की वहां मौत हो गई थी. पॉइंट ये है कि लोगों को पकड़ने की बात नहीं है. थिएटर के लोगों को पकड़ो. यहां अभी भी, हम लोग करते हैं कुछ, पुलिस की इजाजत, फायर डिपार्टमेंट की इजाजत, सबकी इजाजत हम लेकर ऑर्गेनाइज करते हैं कि इसमें ये सिक्योरिटी है. तो कसूर उनका है. इस बेचारे को उठाकर आपने डाल दिया किस खुशी में? आप एक चीज बताइए कि जिन लोगों को आपने काम पर रखा है उनका भी तो कुछ बनता है. आपने बेस्ट टीम रखी है ये उनका काम है, ये हीरो का काम नहीं है. बेचारा, उसने क्या किया है. उसने एक्टिंग ही की है न. आप उसको पकड़ रहे हो. या तो पूरी पिक्चर को उठाओ. डायरेक्टर, प्रोड्यूसर, सिनेमैटोग्राफर, सबको लो और डालो अंदर. ये आपको पब्लिसिटी देता है. अब देखते हैं कि ये उनके फायदे में काम करता हैं या नहीं. लोग सोचते हैं कि चलो, पिक्चर की और टिकटें ले लो. मैं शायद जाकर देख लूं अब.’
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