अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बेरूत हवाई हमले से अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लगभग प …और पढ़ें
बेंजामिन नेतन्याहू और डोनल्ड ट्रंप।
ट्रंप ने नेतन्याहू को शांति समझौते में बाधा बताया।
बोले- इजरायल को अमेरिका का आभारी होना चाहिए।
डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति समझौते के एलान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर हवाई हमला करके इस शांति समझौते को लगभग पटरी से उतार दिया था, जिसकी वजह से वाशिंगटन और तेहरान के बीच यह समझौता होने में देरी हुई।
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को दिए एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने नेतन्याहू को एक बहुत ही मुश्किल इंसान बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल को इस शांति समझौते के लिए अमेरिका का बहुत शुक्रगुजार होना चाहिए, क्योंकि इस डील ने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोक दिया है। ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा कि ईमानदारी से कहूं तो उन्हें हमारा आभारी होना चाहिए। क्योंकि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो इजरायल दो घंटे भी नहीं टिक पाता।
अमेरिका और ईरान दोनों ने साफ किया है कि लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म किया जाएगा। यह ऐतिहासिक समझौता 19 जून को स्विट्जरलैंड में साइन होने वाला है।
इस डील के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य के कमर्शियल समुद्री रास्ते को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर गाइडलाइंस (नियम) तय की जाएंगी। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि इस समझौते के बाद यह समुद्री व्यापारिक रास्ता हमेशा के लिए टोल-फ्री हो जाएगा।
बता दें कि इस पूरी शांति बातचीत में इजरायल को शामिल नहीं किया गया था, और इजरायल ने इस समझौते की खबर पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया भी नहीं दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के लिए इस डील को स्वीकार करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि उनके पास ईरान और लेबनान के हिजबुल्लाह जैसे उसके समर्थित संगठनों के साथ जंग जारी रखने के अपने घरेलू राजनीतिक कारण हैं।
ट्रंप ने इंटरव्यू में चेतावनी भी दी कि अगर ईरान सरकार तय समय सीमा के भीतर अंतिम परमाणु समझौते पर राजी नहीं होती है, तो अमेरिकी सेना ईरान पर फिर से हमले शुरू कर देगी। यही नहीं, ट्रंप ने एक अनोखा प्रस्ताव रखते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका मिडिल ईस्ट का रक्षक बन जाएगा, लेकिन इसके बदले में पूरे क्षेत्र की कमाई (रेवेन्यू) का 20 प्रतिशत हिस्सा लेगा।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या सऊदी अरब और यूएई जैसे अमेरिकी सहयोगी देश अमेरिका को एक ‘पेड पुलिस फोर्स’ बनाने की इस बात पर सहमत हैं, तो उन्होंने सीधा जवाब न देते हुए सिर्फ इतना कहा कि उन्होंने अभी इस मुद्दे पर बातचीत शुरू ही की है। उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ तब होगा, अगर ईरान दुश्मन बना रहता है।
इसके अलावा दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने ईरान के मौजूदा नेतृत्व और वहां के नए सर्वोच्च नेता आयतल्लाह मोजतबा खमेनेई को व्यावहारिक बताया। ट्रंप का यह रुख युद्ध के शुरुआती दिनों से बिल्कुल अलग है, जब उन्होंने ईरानी जनता से अपील की थी कि अमेरिकी और इजरायली बमबारी खत्म होने के बाद वे उठ खड़े हों और अपनी सरकार का तख्तापलट कर दें।
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