इस राज्य में NRC से पहले नहीं होगी जनगणना! 1951 होगा बेस ईयर; 24475 घुसपैठिए मिले – Hindustan

मणिपुर सरकार ने राज्य में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने सोमवार को विधानसभा में कहा कि मणिपुर में NRC के लिए 1951 को आधार वर्ष बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस विवादित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

गृह मंत्री ने यह बात कांग्रेस विधायक कीशम मेघचंद्र सिंह के NRC से जुड़े सवाल के जवाब में कही। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना राज्य सरकार अकेले NRC लागू नहीं कर सकती।

मणिपुर में NRC का आधार वर्ष 1951 रखने की मांग मैतेई और नागा समुदायों की ओर से की जा रही है। 1951 में राज्य में पहली बार NRC कराया गया था। वहीं, कुकी-जो समुदाय इसका विरोध कर रहा है। पूर्वोत्तर के एक अन्य राज्य असम में 2018 में NRC कराया गया था। वहां असम समझौते के मुताबिक इसका आधार वर्ष 1971 रखा गया था।

मणिपुर में NRC का मुद्दा बेहद संवेदनशील बना हुआ है। पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने राज्य में जनसंख्या की गणना यानी सेंसस को टाल दिया था। इसके बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिनमें जनगणना से पहले NRC कराने की मांग की गई थी।

गोविंदास कोंथौजम ने कहा कि राज्य सरकार पिछले सप्ताह विधानसभा में पारित प्रस्ताव के अनुरूप केंद्र के साथ इस मामले को आगे बढ़ाएगी। विधानसभा ने प्रस्ताव पारित कर कहा था कि मणिपुर में NRC होने से पहले जनगणना नहीं कराया जाना चाहिए।

गृह मंत्री ने कहा कि NRC के मुद्दे को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने असम के NRC का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां NRC लागू किया गया, लेकिन इसे अभी तक पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया गया है और मामला अदालत में लंबित है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पहले भी केंद्र से मणिपुर में NRC लागू करने का आग्रह कर चुकी है।

कोंथौजम के मुताबिक, विधानसभा ने 1 मार्च 2024 के अपने पहले के प्रस्ताव की फिर पुष्टि की थी। इसके बाद 2 सितंबर 2026 को सदन ने सर्वसम्मति से अपने पुराने फैसलों की दोबारा पुष्टि करते हुए प्रस्ताव पारित किया। गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र के साथ इस मामले को सावधानी से आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि मणिपुर में NRC का परिणाम असम में हुए अभ्यास जैसा न हो।

असम में पहली बार NRC 1951 में कराया गया था। इसके अपडेट की प्रक्रिया 2014 में शुरू हुई थी। अगस्त 2019 में असम के NRC के अपडेट की अंतिम रिपोर्ट आई थी। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी और इसका उद्देश्य अवैध घुसपैठियों को बाहर करना था।

अंतिम सूची में करीब 19 लाख आवेदकों को जगह नहीं मिली थी। हालांकि, इस आंकड़े को लेकर भी विवाद है। NRC की सूची को अभी तक भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने मंजूरी नहीं दी है और इस पांच साल लंबी प्रक्रिया में बदलाव की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं लंबित हैं।

अवैध घुसपैठिए को लेकर कांग्रेस विधायक थ. लोकेश्वर सिंह के एक अन्य सवाल के जवाब में गृह मंत्री ने बताया कि मणिपुर में अब तक 24,475 बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों का पता चला है।

गृह मंत्री के मुताबिक, इनमें से 14,992 लोग म्यांमार लौट चुके हैं, जबकि 9,453 लोग अभी भी सीमा से लगे जिलों में मौजूद हैं और उन्हें अस्थायी शिविरों में रखा गया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को म्यांमार वापस भेजा गया है, जबकि कुछ लोग मणिपुर के सीमावर्ती जिलों में शरण ले रहे हैं। यह प्रक्रिया राजनयिक माध्यमों के जरिए की गई।

गृह मंत्री ने जिलेवार जानकारी भी विधानसभा में दी।

कामजोंग: यहां मिले 6,545 लोगों में से 5,378 को म्यांमार वापस भेजा गया। बाकी 1,167 लोगों को सरकार की ओर से कम्युनिटी हॉल में बनाए गए शिविरों में रखा गया है।

टेंगनौपाल: यहां मिले 3,560 लोगों में से केवल 14 को वापस भेजा गया है। बाकी 3,546 लोगों पर सरकार नजर रख रही है, ताकि वे मणिपुर के दूसरे जिलों में न जा सकें।

चंदेल: यहां मिले 14,370 लोगों में से 9,600 को म्यांमार वापस भेजा गया। बाकी 4,770 लोगों में से 1,308 के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड लिए गए हैं।

कुकी-जो काउंसिल ने अमित शाह को सौंपा ज्ञापन

इस बीच, 7 सितंबर को कुकी-जो काउंसिल (KZC) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक ज्ञापन सौंपा। काउंसिल ने कहा कि किसी भी कुकी-जो संगठन ने जनगणना से पहले NRC कराने की मांग नहीं की है। उसने केंद्र से आग्रह किया कि 1951 के ऐसे आधार को, जिसे वह अप्रमाणित या ऐतिहासिक रूप से अविश्वसनीय मानती है, आधार बनाकर मणिपुर में NRC की प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।

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