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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने ईरान के तेल निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने चीन स्थित प्रमुख तेल रिफाइनरी हेंगली पेट्रोकेमिकल (Hengli Petrochemical) और लगभग 40 शिपिंग कंपनियों तथा टैंकरों पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए. अमेरिका का कहना है कि ये प्रतिबंध ईरानी तेल की खरीद और परिवहन से जुड़ी कंपनियों पर लगाए गए हैं जो ट्रंप प्रशासन की मैक्सिमम प्रेशर रणनीति का हिस्सा हैं. इसका मकसद ईरान की मुख्य आय का स्रोत-तेल निर्यात को पूरी तरह बंद करना है.
ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए इन प्रतिबंधों की जद में चीन के डैलियन शहर स्थित हेंगली पेट्रोकेमिकल (Hengli Petrochemical) की रिफाइनरी भी आई है. ये चीन की सबसे बड़ी स्वतंत्र रिफाइनरियों में से एक है, जिसकी क्षमता रोजाना 4 लाख बैरल कच्चे तेल को प्रोसेस करने की है.
ट्रेजरी विभाग का कहना है कि हेंगली 2023 से ही ईरानी तेल की खेप प्राप्त कर रही है. ‘यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान’ नामक समूह ने भी पहले ही हेंगली को ईरानी तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल बताया था.
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि उनका विभाग उन बिचौलियों और खरीदारों के नेटवर्क को पूरी तरह बंद कर देगा जिस पर ईरान निर्भर है. बेसेंट ने इस महीने की शुरुआत में चीन, हांगकांग, यूएई और ओमान के वित्तीय संस्थानों को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा कि यदि ईरानी पैसा इन देशों के बैंकों में है या वो ईरानी तेल खरीद रहे हैं तो अमेरिका ‘सेकेंडरी सैंक्शंस’ लगाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
ईरान के साथ जारी तनाव और फारस की खाड़ी में युद्ध जैसी स्थिति के कारण वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है. इस संकट के प्रभाव को कम करने के लिए ट्रेजरी विभाग ने रूसी तेल पर अस्थायी छूट दी है.
इसके अलावा, समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल के लिए भी एक बार की विशेष छूट जारी की गई है. हालांकि, अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के अवैध वित्तीय प्रवाह को पूरी तरह रोकना है.
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