ईरानी राष्ट्रपति की बेटी जहरा को भाया दिल्ली, क्या कुछ देखा? – abplive.com

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की बेटी जहरा और उनके पति हसन मजीदी ने शनिवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स बाजार का दौरा किया. उन्होंने ब्रिक्स के सदस्य और सहयोगी देशों की कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती शानदार प्रदर्शनी देखी.
कारीगरों और शिल्पकारों से बात की
जहरा पेजेशकियान और हसन मजीदी के साथ महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी मौजूद थीं. इस दौरान वो विभिन्न स्टॉल्स पर मौजूद कारीगरों और शिल्पकारों से बात करती नजर आईं. उन्होंने ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों के कई पवेलियन देखे, जिनमें भारतीय पवेलियन भी शामिल था. साथ ही, उन्होंने सभी देशों की पारंपरिक कला, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखी.
Zahra Pezeshkian, daughter of of the President of the Islamic Republic of Iran, visited the Pradhanmantri Sangrahalaya in New Delhi. She explored the museum showcasing the journeys, contributions and legacies of India’s Prime Ministers.@DDNewslive pic.twitter.com/60AsWq75pL

ब्रिक्स बाजार सदस्य और सहयोगी देशों के कारीगरों, डिजाइनरों और क्रिएटिव उद्यमों को एक मंच पर लाने का प्रयास है. इसके जरिए इन देशों की विविध संस्कृतियों और रचनात्मकता से साक्षात्कार होता है. यह बाजार आने वालों को असल शिल्प, हथकरघा, टेक्सटाइल, कलाकृतियों और कई अन्य उत्पादों को देखने का मौका देता है, जो भाग लेने वाले देशों की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाते हैं.
A cultural connect at the Iran Pavilion at #BRICS Bazaar, New Delhi.

Zahra Pezeshkian, daughter of Iranian President Masoud Pezeshkian, and her husband Hassan Majidi visited the pavilion and interacted with the artisans and representatives showcasing Iran’s rich art, crafts and… pic.twitter.com/ZYLmqvAg7I

दो ईरानी स्टॉल्स लगे
यहां ईरानी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले दो स्टॉल भी लगाए गए हैं, जिनमें देश की पारंपरिक कढ़ाई और हस्तशिल्प विरासत को दिखाया गया है.
ईरानी स्टॉल्स में से एक बलोची कढ़ाई को प्रदर्शित करता है. इसे नादिया करीमी ने लगाया है. बलोची कढ़ाई, जिसे स्थानीय भाषा में “दोच” (जिसका अर्थ है सिलाई या सुई का काम) कहा जाता है, एक प्राचीन और बारीक हाथ की सिलाई वाली कला है. इसे पाकिस्तान, ईरान और अफगानिस्तान में फैले बलूचिस्तान क्षेत्र की महिलाएं करती हैं.
करीमी पारंपरिक बलोची कढ़ाई तकनीक को आधुनिक डिजाइनों के साथ मिलाती हैं, ताकि सदियों पुरानी इस कला को आधुनिक रूप दिया जा सके. उन्होंने हाल ही में कनाडा में ‘तारन’ नाम का एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड शुरू किया है, जो ईरानी कला और उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित करता है.
ईरान का दूसरा स्टॉल आमनेह सेदिघी ने लगाया है, जिसमें रश्ती कढ़ाई और ईरानी सुई के काम के अन्य रूप दिखाए गए हैं. इस कला में पारंपरिक ईरानी सुई का काम और कढ़ाई शामिल है, खासकर रश्ती कढ़ाई (जिसे रश्ती-दूजी भी कहा जाता है) और साथ ही शीशे का काम (जिसे आईनेह-दूजी कहा जाता है).
रश्त के हस्तशिल्प को आधुनिक रोजमर्रा के उत्पादों, जैसे कपड़े, जूते और सैंडल, में बदला गया है, जबकि इस क्षेत्र की पारंपरिक कलात्मक विरासत की खूबियों को भी बनाए रखा गया है.
इनपुट-आईएएनएस
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दीक्षा छाबड़ा ABP live.Com में सीनियर कॉपी एडिटर हैं. यहां ये  न्यूज डेस्क का हिस्सा हैं. दीक्षा को देश, विदेश और एंटरटेनमेंट की दुनिया में काफी दिलचस्पी है. वो इन सभी के बारे में लिखती हैं. इन्हें पत्रकारिता के जगत में 9 साल पूरे हो चुके हैं. इन्होंने अपने करियर की शुरुआत इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ की थी. इसके बाद से ये इंडिया टीवी, टीवी9 जैसी संस्थाओं में एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर चुकी हैं. दीक्षा ने अपनी पढ़ाई इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट से की है.
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