ईरान का पावर स्ट्रक्चर: किसके हाथों में है जंग की असली कमान? जानिए मोजतबा खामेनेई से लेकर IRGC की ताकत – Zee News

Iran power structure leadership: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के बीच सबसे बड़ा सवाल है कि ईरान में असली ताकत किसके हाथ में है. सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के पास सर्वोच्च अधिकार हैं, लेकिन IRGC की सैन्य और आर्थिक पकड़ बेहद मजबूत है. राष्ट्रपति की भूमिका सीमित है, जबकि गार्जियन काउंसिल और अन्य संस्थाएं फैसलों को प्रभावित करती हैं. सत्ता कई हिस्सों में बंटी है, जिससे युद्ध और शांति के फैसले जटिल हो जाते हैं और पर्दे के पीछे बड़ा पावर गेम चलता रहता है.
Iran power structure leadership: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है. इजराइल और अमेरिका के भारी हमलों के बावजूद ईरानी शासन झुकने को तैयार नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि ईरान में असली ताकत किसके पास है? 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत में एक हवाई हमले में अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नामित किया गया है, लेकिन उन्होंने अब तक केवल कुछ लिखित बयान जारी किए हैं और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं.
जंग के बीच कूटनीति और सत्ता की खींचतान
एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे बिना किसी समझौते के भी ईरान पर हमले रोक सकते हैं, वहीं बेंजामिन नेतन्याहू ने ‘ईरान के आतंकी शासन’ को कुचलने की कसम खाई है. इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि अगर अमेरिका ‘सुरक्षा गारंटी’ दे, तो उनका देश युद्ध खत्म करने में दिलचस्पी रखेगा.
हालांकि, ईरान के सिस्टम में राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित हैं. ईरान एक ‘इस्लामी धर्मतंत्र’ है, जहां ‘गार्जियनशिप ऑफ द ज्यूरिस्ट’ के सिद्धांत के तहत धार्मिक विद्वान व्यवस्था चलाते हैं. सर्वोच्च नेता से लेकर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) तक, ईरान की सत्ता कई शक्तिशाली हिस्सों में बंटी हुई है. आइए समझते हैं कि ईरान का यह पावर स्ट्रक्चर वास्तव में कैसे काम करता है.
सर्वोच्च नेता: ईरान का सबसे शक्तिशाली पद
ईरान के संविधान के मुताबिक, सुप्रीम लीडर ही देश की घरेलू और विदेशी नीतियों का फैसला करता है. वर्तमान में यह पद मोजतबा खामेनेई के पास है.
युद्ध और शांति का अधिकार: सर्वोच्च नेता ही सेना का कमांडर-इन-चीफ होता है. केवल वही युद्ध की घोषणा कर सकता है या शांति समझौते पर मुहर लगा सकता है.
नियुक्तियां: वह न्यायपालिका के प्रमुख, सरकारी रेडियो-टीवी नेटवर्क के डायरेक्टर और शक्तिशाली IRGC के कमांडर की नियुक्ति और बर्खास्तगी कर सकता है.
गार्जियन काउंसिल: वह 12 सदस्यों वाली गार्जियन काउंसिल के आधे सदस्यों को सीधे नियुक्त करता है, जो संसद के फैसलों पर नजर रखते हैं.
राष्ट्रपति: शासन का दूसरा चेहरा
राष्ट्रपति ईरान में सरकार का मुखिया और सुप्रीम लीडर के बाद दूसरा सबसे बड़ा पद है, लेकिन उसकी शक्तियां सीमित हैं.
कार्यकाल: राष्ट्रपति अधिकतम चार साल के दो कार्यकाल तक सेवा कर सकता है. वह कानून लागू करता है और बजट पेश करता है.
सीमाएं: वह अपनी कैबिनेट के मंत्रियों को चुनता है, लेकिन उन्हें संसद से मंजूरी लेनी होती है. साथ ही, वह केवल सर्वोच्च नेता की इच्छा के अनुसार ही कूटनीति और शासन चला सकता है.
शक्तिशाली संस्थाएं: गार्जियन काउंसिल और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स
ईरान में कुछ ऐसी संस्थाएं हैं जो किसी भी फैसले को पलटने की ताकत रखती हैं.
गार्जियन काउंसिल (Council of Guardians): यह संस्था संसद द्वारा पारित कानूनों की जांच करती है कि वे शरिया कानून के मुताबिक हैं या नहीं. इसने अब तक संसद के लगभग 40 प्रतिशत कानूनों को रद्द किया है. यही संस्था यह तय करती है कि कौन चुनाव लड़ सकता है.
असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स (Assembly of Experts): इसमें 86 विद्वान होते हैं जो सर्वोच्च नेता का चुनाव करते हैं. ये साल में एक बार मिलते हैं और समय-समय पर सर्वोच्च नेता के पद की पुष्टि करते हैं.
एक्सपीडिएंसी काउंसिल (Expediency Council): यह संसद और गार्जियन काउंसिल के बीच विवाद सुलझाने का काम करती है और सर्वोच्च नेता को सलाह देती है.
IRGC: सेना और अर्थव्यवस्था पर पकड़
इस्लामी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ईरान की नियमित सेना से अलग है और कहीं ज्यादा ताकतवर है. इसकी स्थापना 1979 में क्रांति की रक्षा के लिए की गई थी. यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को संभालती है और लेबनान, सीरिया, इराक और यमन में अपने ‘प्रॉक्सी’ के जरिए विदेशी नीति को प्रभावित करती है. इतना ही नहीं, IRGC का ईरान के बड़े आर्थिक क्षेत्रों जैसे निर्माण और टेलीकम्युनिकेशन पर गहरा कब्जा है. इसे ईरान का सबसे स्वायत्त और शक्तिशाली केंद्र माना जाता है.
न्यायपालिका और खुफिया तंत्र
ईरान की न्यायपालिका और खुफिया विभाग (MOIS) सीधे सर्वोच्च नेता को रिपोर्ट करते हैं. यहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामलों की सुनवाई होती है और इनके फैसलों के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती. वहीं, खुफिया मंत्रालय यानी MOIS. यह देश के अंदर और बाहर की साजिशों की जांच करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह विदेशों में भी ऑपरेशन चलाने में मुख्य भूमिका निभाता है.
कुल मिलाकर, ईरान में सत्ता केवल एक व्यक्ति के हाथ में नहीं, बल्कि कई संस्थाओं के बीच उलझी हुई है. राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भले ही शांति का रास्ता ढूंढ रहे हों, लेकिन असली ताकत मोजतबा खामेनेई और IRGC के पास है. जब तक ये शक्तिशाली धड़े सहमत नहीं होते, युद्ध का अंत होना मुश्किल नजर आता है. मोजतबा का हफ्तों से सार्वजनिक रूप से सामने न आना भी इस बात की ओर इशारा करता है कि पर्दे के पीछे अभी बहुत कुछ चल रहा है.
ये भी पढ़ें: जंग का मैदान छोड़ रहे ट्रंप! नाटो ने नकारा अब अरब देशों का सहारा, अमेरिका युद्ध के लिए मांगेगा आर्थिक मदद
Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, जियो-पॉलिटिक्स, इंडियन आर्मी, इंडियन एयरफोर्स, इंडियन नेवी, हथियारों और डिफेंस की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप
प्रशांत सिंह के लेख रिसर्च-आधारित, फैक्ट-चेक्ड और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित होते हैं. ये जियोपॉलिटिक्स और रक्षा से जुड़ी खबरों को आसान हिंदी में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. …और पढ़ें
By accepting cookies, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News