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होर्मुज पर नाकेबंदी जारी है, जिसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है. कच्चे तेल की कीमतें पिछले चार साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद 28 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष अब भी थमा नहीं है, और इस दौरान दुनिया का अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट बंद है. इससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का करीब 20% प्रभावित हुआ है.
वहीं, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशें ठप पड़ी हैं. अमेरिका, ईरान के तेल निर्यात पर नौसैनिक नाकेबंदी के जरिए दबाव बनाकर बातचीत में गतिरोध तोड़ने की कोशिश कर रहा है. चूंकि तेल निर्यात ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, ऐसे में इस नाकेबंदी से उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा है कि दुनिया ने ईरान के धैर्य और समझौते की भावना को देखा है. जो कुछ नौसैनिक ब्लॉकेड के नाम पर किया जा रहा है, वह दरअसल एक ऐसे देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विस्तार है, जो अपनी स्वतंत्रता और प्रतिरोध की कीमत चुका रहा है. इस तरह के दमनकारी रवैये को जारी रहना बर्दाश्त से बाहर है.
शांति वार्ता को लेकर सस्पेंस जारी
अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ताओं को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है. एक ओर ट्रंप ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते पर बातचीत की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर विवादित बयान देते हुए इसे स्ट्रेट ऑफ ट्रंप बताया है. इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि एक बड़ा तूफान आने वाला है, जिसे कोई नहीं रोक सकता.
होर्मुज क्षेत्र में 100% अचूक नाकेबंदी का दावा किया गया है. बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना ने वहां 2 वॉरशिप्स, 25 युद्धपोत और 200 से अधिक विमानों की तैनाती की है, जिनकी वजह से अब तक 42 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है. ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की वायु सेना, नौसेना और रडार सिस्टम का करीब 80% हिस्सा नष्ट कर दिया गया है.
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