ईरान जंग के बीच भारत के लिए गुड न्यूज, पुराना दोस्त 95 लाख बैरल तेल देने को तैयार – Hindustan Hindi News

ईरान से अमेरिका और इजरायल की जंग, मिडिल-ईस्ट में लगातार खराब होते हालात और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट के बीच तेल सप्लाई में आई रुकावट के बीच रूस ने भारत को राहत भरी खबर दी है। रूस ने कहा है कि वह भारत को करीब 95 लाख बैरल कच्चा तेल भेजने को तैयार है ताकि संभावित सप्लाई रुकावटों को दूर किया जा सके। रूस का यह ऐलान इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत के पास फिलहालकेवल 25 दिनों की हाँ क्रूड ऑयल बचा है।

इंडस्ट्री के एक सोर्स ने रॉयटर्स को बताया कि भारत के पास समंदर में जहाजों में लगभग 95 लाख बैरल रूसी क्रूड ऑयल लदे हैं और यह कुछ ही हफ़्तों में भारत पहुँच सकते हैं। सोर्स ने यह बताने से मना कर दिया कि गैर-रूसी फ्लीट का कार्गो असल में कहाँ जा रहा था, लेकिन कहा कि वे कुछ हफ़्तों में भारत पहुँच सकते हैं, जिससे भारतीय रिफाइनरियो को तुरंत राहत मिल सकेगी।

रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भी बृहस्पतिवार को कहा कि उनका देश भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए हमेशा तैयार रहा है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उनका यह बयान आया है। वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उस समय उछाल आया है जब ईरान ने व्यावहारिक रूप से होर्मुज की खाड़ी को अवरुद्ध कर दिया है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित यह संकरा समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) के परिवहन का प्रमुख रास्ता है।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88 प्रतिशत आयात करता है, जबकि प्राकृतिक गैस की करीब आधी आवश्यकता भी आयात से पूरी होती है। इनका बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है। ऐसे में पश्चिम एशिया में लंबे समय तक अस्थिरता बने रहने की स्थिति भारत के राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदेह मानी जा रही है, क्योंकि यह क्षेत्र देश की ऊर्जा सुरक्षा का प्रमुख स्रोत है। राजदूत अलीपोव ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “हम हमेशा से भारत को कच्चा तेल आपूर्ति करने के लिए तैयार रहे हैं।” उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर भारत को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की।

अमेरिका ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मुख्य रूप से इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले शुरू किए। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए। पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों के बीच हमलों और जवाबी हमलों के कारण यह संघर्ष काफी तेज हो गया है। इसी दौरान हाल के सप्ताहों में रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात में भी तेज गिरावट देखी गई है।

पिछले महीने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नयी दिल्ली के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया था कि भारत रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने पर सहमत हो गया है। इसके साथ ही ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिए भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क को भी वापस ले लिया था। यह शुल्क अगस्त में भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण लगाया गया था। अमेरिका ने अपने आदेश में कहा था कि वह इस बात की निगरानी करेगा कि भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूस से तेल खरीद फिर शुरू करता है या नहीं। इसी आधार पर यह तय किया जाएगा कि 25 प्रतिशत शुल्क फिर से लगाया जाएगा या नहीं।

भारत का रुख हालांकि यह रहा है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों से तेल खरीदेगा और आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए खरीदारी में विविधता लाएगा। सरकार का कहना है कि तेल खरीद में राष्ट्रीय हित ही मार्गदर्शक कारक रहेगा।

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन’ रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन’ है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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