Iran Israel Cluster Bomb attack: इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने कहा कि ईरान ने जानबूझकर बम गिराए हैं. ताकि अधिक से अधिक नुकसान हो. IDF के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल Nadav Shoshani ने कहा कि नागरिकों को निशाना बनाना युद्ध अपराध है. इजरायल अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी रक्षा करता रहेगा.
Iran Israel Cluster Bomb attack: इजरायल ने ईरान पर रिहायशी इलाकों पर सब-म्यूनिशन बम दागने का आरोप लगाया है. इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) ने कहा कि ईरान ने जानबूझकर बम गिराए हैं. ताकि अधिक से अधिक नुकसान हो. IDF के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल Nadav Shoshani ने कहा कि नागरिकों को निशाना बनाना युद्ध अपराध है. इजरायल अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपनी रक्षा करता रहेगा.
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Iran intentionally fired missiles that contained cluster sub-munitions at a densely populated civilian area in Israel. Cluster weapons are designed to disperse over a large area and maximize the chances of a harmful strike. Iran goes to great lengths in trying to… pic.twitter.com/tgtYJ7M8dU
— LTC Nadav Shoshani (@LTC_Shoshani) February 28, 2026
क्या है क्लस्टर म्यूनिशन बम?
क्लस्टर बम छोटे-छोटे बमों का पूरा ग्रुप होता है. जो एक बड़े से कंटेनर में भरे होते हैं. इन बमों लॉन्च करने के बाद ये कंटेनर हवा में खुलता है. इससे छोटे-छोटे बम निकल कर एकसाथ कई टारगेट पर हिट करते हैं. क्लस्टर बम जमीन पर गिरने के कुछ समय बाद फटता है. यह जरूरत के हिसाब से फटने के लिए डिजाइन किया गया है.
यह बम हवा में भी फट सकते हैं. जमीन पर गिरने के कुछ देर बाद भी फट सकते हैं. कई बार ये बम फटते नहीं है. ये सालों तक जमीन में दबे रहते हैं. उसके सालों पर छूने से फटकर नुकसान पहुंचाते हैं. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक साल 1964 से1973 तकके वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका ने लाओस पर 27 करोड़ क्लस्टर बम गिराए. इनमें से 8 करोड़ बम बिना फटे रह गए. आज भी वहां हर साल 50 से 100 लोग इनके शिकार होते हैं.
क्लस्टर बम के प्रकार
एंटी-पर्सनल क्लस्टर बम: इनमें छोटे-छोटे धातु के टुकड़े यानी शार्पनेल होते हैं. जो विस्फोट के बाद चारों तरफ फैल जाते हैं. इन्हें खास तौर पर इंसानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है.
एंटी-टैंक क्लस्टर बम: ये बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों को खत्म करने के लिए होते हैं. इनमें खास तरह का विस्फोटक होता है. जो मोटी परत वाली धातु को उड़ा सकता है.
कम्बाइंड इफेक्ट क्लस्टर बम: ये गाड़ियों और लोगों दोनों तरह के टारगेट्स को नुकसान पहुंचाने के लिए बनाए जाते हैं. इन बमों से रनवे और इमारों को तबाह किया जा सकता है.
इन्सिडियरी क्लस्टर बम: ये आग लगाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं. जो इमारतों और जंगलों को तबाह कर सकते हैं.
वॉर क्राइम किसे कहा जाता है?
क्लस्टर बमों का इस्तेमाल वॉर क्राइम माना जाता है. इसमें आम नागरिकों का अधिक नुकसान होता है. जो कि युद्ध के कानूनों के खिलाफ है. इसमें कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन्स (CCM) शामिल है. 30 मई 2008 को आयरलैंड के डबलिन में CCM समझौता हुआ. इसे 1 अगस्त 2010 से लागू किया गया. CCM के तहत क्लस्टर बमों को बनाना, स्टोर करना, इस्तेमाल करना और खरीदना-बेचना पूरी तरह से बैन है. साल 2024 तक CCM को 148 देशों ने स्वीकार किया. इनमें से 112 देशों ने ही इस पर साइन किए हैं.
साल 2024 की क्लस्टर म्यूनिशन मॉनिटर रिपोर्ट छापी. इसमें बताया कि CCM पर साइन करने वाले देशों में से सिर्फ 10 देश ऐसे हैं. जिनके पास रिसर्च और ट्रेनिंग के लिए क्लस्टर बम मौजूद हैं. बाकी सभी देशों ने अपना क्लस्टर बम का जखीरा नष्ट कर दिया है.
इससे अब तक कितनी मौत?
क्लस्टर म्यूनिशन मॉनिटर रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 तक दुनिया भर में 23 हजार लोगों की मौत क्लस्टर बम के इस्तेमाल से हो चुकी है. इजराइल पर ईरान के क्लस्टर बम के हमले से पहले यूक्रेन और रूस की जंग में क्लस्टर बम का जमकर इस्तेमाल हुआ है. रूस और यूक्रेन दोनों CCM के खिलाफ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन में क्लस्टर बम के हमलों में 1000 से अधिक लोग मारे गए.
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सचेंद्र सिंह का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से है. इन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई ‘संगम नगरी’ प्रयागराज में स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से की है. पढ़ने और लिखने में इनकी ऐसी रूचि रही कि इन्होंने पत्रकारिता जगत से जुड़कर अपना करियर बनाने की ठान ली. फिलहाल सचेंद्र ज़ी मीडिया समूह से जुड़कर ‘ज़ी भारत : ZEE Bharat’ के डिजिटल प्लेटफॉर्म में अपना योगदान दे रहे हैं. …और पढ़ें
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