Shreeom Singh
Date: 15-10-26 11:33
मिडिल ईस्ट में पहले से ही तनाव बना हुआ है. इस बीच अमेरिका की एक संभावित सैन्य योजना को लेकर चर्चा तेज हो गई है. खबरों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान पर भविष्य में होने वाले हमलों के लिए अपने सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बमों में से एक ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ के इस्तेमाल की योजना पर विचार कर रही है.
अगर अमेरिका इस बम का इस्तेमाल करता है, तो ईरान के साथ उसका टकराव और गंभीर हो सकता है. हालांकि, अभी तक इस बम के इस्तेमाल को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है.
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल अली आजमाई ने भी अमेरिका को चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था कि अमेरिकी जहाजों की किसी भी कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा. ऐसे में बड़े हमले की संभावनाओं से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है.
अमेरिका ने तैयार की सैन्य कार्रवाई की योजना
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए योजनाएं तैयार की हैं. रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोबारा हमले का आदेश देते हैं, तो इन योजनाओं पर आगे बढ़ा जा सकता है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने इस बम के इस्तेमाल का फैसला कर लिया है. फिलहाल यह संभावित सैन्य विकल्पों में से एक बताया जा रहा है.
क्या है ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’?
‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ का आधिकारिक नाम GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट (MOAB) है. यह अमेरिका के सबसे बड़े गैर-परमाणु बमों में से एक है. इसे बड़े क्षेत्र में भारी तबाही मचाने की क्षमता के लिए जाना जाता है.
यह परमाणु बम नहीं है, लेकिन इसके विस्फोट से आसपास के इलाके में जबरदस्त नुकसान हो सकता है. इसका इस्तेमाल बड़े सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है.
रिपोर्ट में इस बम की लंबाई करीब 20 फीट बताई गई है. हालांकि, इसकी मारक क्षमता और किसी खास ठिकाने पर इसका असर उस जगह की बनावट और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
क्या ईरान पर बड़े हमले से बढ़ेगा युद्ध का खतरा?
अगर अमेरिका ईरान पर फिर से बड़े हमले करता है, तो दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है. इसका असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में हालात बिगड़ने का खतरा भी बढ़ सकता है.
इसका असर तेल और गैस की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है. अगर ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया जाता है या तेल की सप्लाई बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं.
भारत जैसे देश, जो बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करते हैं, भी इससे प्रभावित हो सकते हैं. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से ईंधन महंगा होने और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी. फिलहाल, अमेरिका की संभावित सैन्य योजना पर नजर बनी हुई है और यह साफ नहीं है कि ट्रंप प्रशासन आगे क्या कदम उठाएगा.
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