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कर्नाटक के ईसाई समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल सोमवार को बेंगलुरु में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने समुदाय की लंबे वक्त से लंबित मांगों को लेकर खड़गे से सीधे हस्तक्षेप का अनुरोध किया. इस बैठक में मुख्य रूप से कर्नाटक धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण विधेयक 2021 यानी धर्मांतरण विरोधी कानून को निरस्त करने और पिछड़ा वर्ग श्रेणी के तहत ईसाई समुदाय के लिए एक प्रतिशत विशेष आरक्षण देने की मांग उठाई गई.
प्रतिनिधिमंडल ने 2021 के फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल के प्रावधानों पर गंभीर चिंता व्यक्त की. ईसाई नेताओं ने कहा कि इस कानून से संविधान द्वारा प्रदत्त अपने धर्म के पालन और प्रचार के मौलिक अधिकारों पर गहरा असर पड़ रहा है. उन्होंने खड़गे से अपील की कि राज्य में इस धर्मांतरण विरोधी कानून को पूरी तरह से निरस्त किया जाना चाहिए.
प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक विधान परिषद में ईसाई समुदाय के एक प्रतिनिधि को मनोनीत करने की मांग रखी. साथ ही पिछड़ा वर्ग वर्गीकरण के अंतर्गत समुदाय के लिए एक प्रतिशत विशेष आरक्षण देने का अनुरोध किया. नेताओं ने समुदाय के सामने मौजूद सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को रेखांकित करते हुए शिक्षा और रोजगार में अवसर बढ़ाने के लिए कदम उठाने की अपील की.
बैठक में विभिन्न सरकारी बोर्डों, निगमों और अन्य वैधानिक तथा मनोनीत निकायों में ईसाई समुदाय के सदस्यों को पर्याप्त और सार्थक प्रतिनिधित्व देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई. प्रतिनिधिमंडल में मैंगलोर के बिशप पीटर पॉल, मैसूर के बिशप फ्रांसिस सेराओ, फादर अरुण लुईस, प्रवीण पीटर, एंथनी विक्रम और जेए कंठराज शामिल थे. खड़गे ने सभी मांगों पर कर्नाटक सरकार से चर्चा कर उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया.
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