21वीं सदी का स्कूल वह है जो स्टूडेंट्स में विचार, संवेदना और जिम्मेदारी- तीनों को समान रूप से विकसित करे। यह कहना था प्रख्यात अर्थशास्त्री एवं नीति-विशेषज्ञ डॉ. मोंटेक सिंह आहलूवालिया का। वे राजमाता कृष्णा कुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूल में 86वें इंडियन
उन्होंने कहा, देश में एआई-इनेबल एजुकेशन से मिलकर ‘नॉलेज इकोनॉमी’ बनेगी जहां गांवों की लड़कियां भी उच्च स्किल हासिल कर सकेंगी और भारत ग्लोबल लीडर बन सकेगा। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स को खुद से सवाल करने चाहिए कि मैं कौन हूं? कहां हूं? कहां जाना चाहता हूं? एआई युग में अनुकूलन, सीखने तथा प्रॉब्लम सोल्विंग पर ध्यान दें। एजुकेशन 5.0 से जेन जेड प्रॉब्लम सॉल्विंग के योद्धा बनेंगे और समानता, इनोवेशन तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट से विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने कहा, अपनी एआई नीति तय करने से पूर्व दृष्टिकोणों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए। एआई के जटिल उपयोग से उत्पन्न एकाधिकारवादी प्रवृत्तियों पर नियंत्रण आवश्यक है। नीतिगत सुधारों से इसे समानता और नवाचार के लिए उपयोगी बनाना होगा।
राजमाता कृष्णाकुमारी गर्ल्स पब्लिक स्कूूल में चल रही 86वें आईपीएससी प्रिंसिपल्स कॉन्क्लेव में पढ़ाई के साथ एआई, टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप को जोड़ने पर मंथन किया गया। एक्सपर्ट्स ने कहा कि अब समय आ गया जब सिर्फ मार्क्स के आधार पर ही ग्रोथ को सीमित न रखा जाएगा बल्कि स्टूडेंट्स के फॉर्मेशन और सेल्फ रियलाइजेशन पर भी ध्यान देना होगा। एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि स्टूडेंट्स केवल श्रोता नहीं, बल्कि को-फाउंडर हैं इसलिए स्कूलों को ऐसे मंच देने होंगे जहां स्टूडेंट्स अपनी आवाज, विजन और लीडरशिप स्किल्स के साथ पार्टनरशिप कर सकें। अध्यक्षता करते हुए पूर्व नरेश गजसिंह ने कहा कि यह प्रिंसिपल्स कॉन्क्लेव भारतीय शिक्षा को मजबूत बनाएगा।
आईपीएससी चेयरपर्सन अनिल शर्मा ने कहा कि राजमाता स्कूल हर 80 वर्ष में एक बार मिलने वाले इस अवसर को प्राप्त करने वाला पहला संस्थान है। हम सभी पूर्व चेयरपर्सन्स के साथ मिलकर शिक्षा के भविष्य को आकार देंगे। राजमाता स्कूल की प्रिंसिपल नीरा सिंह ने कहा कि इस कॉन्क्लेव की मेजबानी केवल आयोजन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, विश्वास और साझी दृष्टि का प्रतीक है।
पैनल डिस्कशन में स्टूडेंट वॉइस और एजेंसी पर बातचीत करते हुए विभिन्न प्रतिभागी स्कूलों के प्रिंसिपल्स ने अपने अनुभवों, चुनौतियों और सफल पहलों को शेयर किया। स्कूल की डीन व आईपीएससी कॉर्डिनेटर सपना गुप्ता ने बताया कि मेहमानों के लिए डिनर बालसमंद पैलेस में रखा जहां कल्चरल बॉंडिंग नाइट में राजस्थानी लोक-नृत्य, मांड और गीतों की प्रस्तुतियां हुईं। इस कॉन्क्लेव में आईपीएससी मेंबर्स स्कूलों के 40 प्रिंसिपल्स सहित कुल 80 शिक्षाविद् शामिल हुए हैं। इनमें करीब कई सैन्य/रक्षा-संरचना से जुड़े रेजिडेंशियल स्कूल हैं।
संस्थाएं व्यक्ति नहीं बदलती, वे माहौल बनाती हैं जहां टेक्नोलॉजी इनोवेशन को बढ़ावा दे सके
एजुकेशन को इनर ग्रोथ और मीनिंग मेकिंग की प्रक्रिया जरूरी है। आज के स्कूलों को केवल मार्क्स तक सीमित न रहकर स्टूडेंट्स के फॉर्मेशन और सेल्फ-रियलाइजेशन की ओर बढ़ना होगा। संस्थाएं व्यक्तियों को नहीं बदलती बल्कि वे माहौल बनाती हैं जहां टेक्नोलॉजी साइकोलॉजिकल सेफ्टी और इनोवेशन को बढ़ावा दें। एआई और डिजिटल टूल्स से डरें नहीं बल्कि उन्हें मल्टी सबजेक्ट्स सीखने का साधन बनाए। पढ़ाई में बदलाव लाने के लिए टेक्नोलॉजी को इसमें शामिल करना होगा ताकि एआई की रुकावटों, सस्टनेबिलिटी तथा वास्तविक परेशानियों के हल के लिए स्टूडेंट्स तैयार हों।
डॉ. रंजन बनर्जी, शैक्षणिक नेता, शिक्षाविद् एवं सलाहकार
AI से डरे नहीं, उसे जेन जेड के लिए फ्लेक्सीबल टूल बनाएं
स्कूलों को पूर्व-निर्धारित कोर्सेज से आगे बढ़कर एआई-सक्षम एजुकेशन अपनानी होगी जहां स्टूडेंट्स स्वायत्तता के साथ नए करिअर की राह चुन सकें। प्रिंसिपल्स व स्टूडेंट्स एआई से डरें नहीं बल्कि उसे टूल बनाकर जेन जेड के लिए फ्लेक्सीबल व एडॉप्टेबल बनाएं। इससे ऐसे फ्लेक्सीबल स्टूडेंट्स तैयार कर सकेंगे जो भारत के कल को उत्साह व उद्देश्य के साथ लीडरशिप देंगे।
डॉ. अमृता दास, करिअर एक्सपर्ट व फाउंडर डायरेक्टर
उद्घाटन समारोह में कल्चरल प्रोग्राम भी हुआ।
पैनल डिस्कशन में स्कूलों के प्रिंसिपल्स ने स्टूडेंटवाइज और एजेंसी पर चर्चा की।
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