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तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक जहांगीर खान पर कानून का शिकंजा कस गया है. पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जहांगीर को गिरफ्तार कर लिया है. जहांगीर को नेपाल की सीमा के समीप से पकड़ा गया है. जहांगीर फलता चुनाव में नाम वापसी का ऐलान करने के बाद से ही अंडरग्राउंड चल रहा था.
जहांगीर खान की गिरफ्तारी को लेकर जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक वह नेपाल की सीमा से सटे इलाके में किराये का मकान लेकर अपने परिवार के साथ रह रहा था. एसटीएफ को आधा दर्जन से अधिक मामलों में जहांगीर की तलाश थी. एसटीएफ ने जहांगीर की गिरफ्तारी के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था.
पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ ने जहांगीर खान के करीबी सहयोगियों के फोन भी ट्रेस करना शुरू कर दिया. जहांगीर ने इसी बीच अपने एक करीबी सहयोगी से संपर्क किया और यही फोन कॉल एसटीएफ के लिए उस तक पहुंचने का रास्ता तैयार कर गई. एसटीएफ ने मोबाइल नेटवर्क के जरिये लोकेशन का पता लगा लिया. एसटीएफ ने तसल्ली से पहले जहांगीर खान का ठिकाना चिह्नित किया.
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एसटीएफ जब जहांगीर खान के ठिकाने को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हो गई, 7 और 8 जून की रात छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. जहांगीर के खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन वसूली समेत कई गंभीर धाराओं में आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं. जहांगीर खान हालिया बंगाल चुनाव में फलता विधानसभा सीट से टीएमसी का उम्मीदवार था. जहांगीर खान ने सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने जहांगीर खान को फलता चुनाव तक के लिए गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे दी थी. जहांगीर ने फिर हाईकोर्ट का रुख कर इसकी अवधि बढ़ाने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने इस बार उसे झटका दे दिया. जहांगीर खान ने फलता चुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था. इसके बाद से ही वह अंडरग्राउंड चल रहा था.
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