नई दिल्ली, एजेंसी। मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वाले साझेदार देशों को भारत से होने वाले निर्यात में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। सिंगापुर और श्रीलंका को निर्यात दोगुने से अधिक बढ़ गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। भारत ने अब तक विभिन्न देशों और समूहों के साथ 17 एफटीए किए हैं, जिनमें सिंगापुर, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, मॉरीशुस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ (ईयू), आसियान और ईएफटीए समूह शामिल हैं। इनमें से 16 समझौते प्रभावी हो चुके हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 में सिंगापुर को भारत का निर्यात 101.2 प्रतिशत होकर 6.52 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले की समान अवधि में 3.24 अरब डॉलर था।
वहीं, श्रीलंका को निर्यात 123.8 प्रतिशत बढ़कर 2.35 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल 1.05 अरब डॉलर था। आसियान क्षेत्र को निर्यात 61.6 प्रतिशत बढ़कर 14.61 अरब डॉलर हो गया, जो अप्रैल-जून 2025-26 में 9.04 अरब डॉलर था। दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) को निर्यात 36.6 प्रतिशत बढ़कर 8.40 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 6.15 अरब डॉलर था। प्रमुख देशों में मलेशिया को निर्यात 75.2 प्रतिशत बढ़कर 2.54 अरब डॉलर और ऑस्ट्रेलिया को 25.2 प्रतिशत बढ़कर 2.68 अरब डॉलर हो गया। ब्रिटेन को निर्यात 11.1 प्रतिशत बढ़कर 3.69 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले 3.32 अरब डॉलर था। भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई, 2026 से प्रभावी हुआ है।
एक अधिकारी ने कहा कि प्रमुख एफटीए भागीदार देशों में भारत के निर्यात में मजबूत वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि इन देशों को निर्यात में तेज वृद्धि ने तिमाही के दौरान कुल निर्यात की गति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में देश का कुल निर्यात 15.92 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर हो गया।
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मजबूत निर्यात वृद्धि सकारात्मक संकेत : फियो
वैश्विक अनिश्चितताओं, पोत परिवहन और लॉजिस्टिक बाधाओं के बीच जुलाई में 19 प्रतिशत की मजबूत निर्यात वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है लेकिन देश को बढ़ते आयात बिल और व्यापार घाटे पर भी ध्यान देने की जरूरत है। निर्यातकों के शीर्ष निकाय फियो ने यह बात कही। देश का वस्तु निर्यात जुलाई में 19.63 प्रतिशत बढ़कर 44.24 अरब डॉलर हो गया। निर्यात में यह वृद्धि जून, 2022 की 30.12 प्रतिशत वृद्धि के बाद सबसे अधिक रही।
फियो के अनुसार, गैर-पेट्रोलियम निर्यात में 12.79 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि भारत के निर्यात क्षेत्र के आंतरिक मजबूती और विविधीकरण का एक महत्वपूर्ण संकेत देती है। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, औषधि, रसायन, कपड़ा जैसे क्षेत्र इस गति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वहीं, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) और श्रम गहन क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने से निर्यात वृद्धि को अधिक रोजगार और व्यापक आर्थिक लाभ में बदलने में मदद मिलेगी।
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