मुंबई: जल संरक्षण विशेषज्ञ और “वॉटरमैन ऑफ इंडिया” राजेंद्र सिंह ने चेतावनी दी है कि, एल नीनो के असर से महाराष्ट्र में वर्षा की कमी हो सकती है, जिससे खासकर वर्षा-छाया वाले क्षेत्रों में कृषि और जल उपलब्धता पर गंभीर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बार-बार आने वाले सूखे से निपटने के लिए राज्य को सख्त फैसले लेने होंगे, जिनमें सूखा प्रभावित जिलों में गन्ने की खेती और चीनी मिलों पर प्रतिबंध भी शामिल है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए मुलाकात में राजेंद्र सिंह ने कहा कि, महाराष्ट्र में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और भूजल दोहन पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं है। पानी का उपयोग रिचार्ज से कहीं ज्यादा हो रहा है, जिससे आने वाले समय में जल संकट और गहरा सकता है।उन्होंने जोर देकर कहा कि, यदि जल पुनर्भरण पर मिशन मोड में काम नहीं किया गया तो सूखे से निपटना मुश्किल होगा।
उन्होंने बताया कि, फसल पैटर्न को क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति के अनुसार तय करना जरूरी है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में अधिक पानी वाली फसलों को बढ़ावा देना “आपदा को निमंत्रण” देने जैसा है। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में गन्ने जैसी पानी की अधिक खपत वाली फसलों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए, अन्यथा जल संरक्षण के प्रयास बेकार हो जाएंगे। राजेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि, यह धारणा गलत है कि गन्ना ही किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाता है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में दलहन और तिलहन बेहतर विकल्प हो सकते हैं, जिनसे किसानों को आय भी मिल सकती है और पानी की बचत भी होगी।
उन्होंने नदी जोड़ परियोजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बदलने के बजाय नदी पुनर्जीवन पर ध्यान देना चाहिए। चेक डैम, तालाब, नदी की गाद निकालने और जल साक्षरता अभियान जैसे उपायों से जल भंडारण बढ़ाया जा सकता है और पानी का बेहतर उपयोग संभव है। सिंह ने कहा कि, जल संकट को गंभीर चुनौती मानते हुए सरकार, किसान और समाज को मिलकर काम करना होगा। बिना सख्त फैसलों के सूखे की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

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