भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत मध्यस्थता का वैश्विक केंद्र न बन सके। …और पढ़ें
ऐसा कोई कारण नहीं कि भारत वैश्विक मध्यस्थता केंद्र न बन सके- सीजेआई (पीटीआई)
भारत में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता को बढ़ावा देने के लिए न्यायिक ढांचा तैयार किया जा रहा है
सिंगापुर और लंदन को टक्कर देने के लिए भारत के कानूनी ढांचे में बड़े बदलाव होंगे
पीटीआई, नई दिल्ली। भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत मध्यस्थता का वैश्विक केंद्र न बन सके।
सीजेआइ ने कहा कि मध्यस्थता अधिनियम, 2023 ने पहली बार विवाद समाधान के इस वैकल्पिक तरीके के लिए एक अलग कानूनी ढांचा तैयार किया है।
साथ ही संस्थान अब जटिल और सीमा-पार मध्यस्थता के मामलों को उसी भरोसे के साथ संभालने में सक्षम हो रहे हैं, जैसा भरोसा दुनिया भर में वाणिज्यिक विवाद सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पक्ष दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय न्यायपालिका, अदालत से जुड़े मध्यस्थता केंद्रों और इसी तरह की अन्य संस्थाओं के निरंतर और सोच-समझकर दिए गए सहयोग की वजह से संभव हो पाई।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत यहां माध्यम इंटरनेशनल काउंसिल फॉर कॉन्फ्लिक्ट रिजोल्यूशन की ओर से आयोजित “इंटरनेशनल एडीआर कान्फ्रेंस” के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “ऐसा कोई कारण नहीं है कि भारत वैश्विक समुदाय के लिए एक केंद्र के रूप में खुद को स्थापित न कर सके।”