ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने किया खुला विरोध: बोले-उत्तराखंड-गुजरात में यूसीसी स्वीकार नहीं, यूसीसी… – Dainik Bhaskar

उत्तराखंड और गुजरात में पारित समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस कानून को ‘अस्वीकार्य’ बताते हुए गंभीर संवैधानिक, कानूनी और लोकतांत्रिक आपत्तियां उठाई हैं। बोर्ड का कहना है कि यह कानून संव
बोर्ड ने कहा कि समान नागरिक संहिता संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों (अनुच्छेद 44) में शामिल है, जो बाध्यकारी नहीं हैं। ऐसे में इसे लागू करने की जल्दबाजी उचित नहीं मानी जा सकती। साथ ही, यह भी कहा गया कि किसी एक या दो राज्यों में लागू कानून को ‘यूनिफॉर्म’ कहना भ्रामक है, क्योंकि यह पूरे देश या सभी वर्गों पर समान रूप से लागू नहीं होता।
जनमत और पारदर्शिता पर सवाल
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता डॉ सैयद कासिम रसूल इलयास ने आरोप लगाया कि यूसीसी को लागू करने से पहले जो जनमत प्रक्रिया अपनाई गई, वह पारदर्शी नहीं थी। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में लोगों ने इसका विरोध किया, लेकिन संबंधित समितियों की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। इससे यह आशंका पैदा होती है कि जनमत को गंभीरता से नहीं लिया गया।
उन्होंने कहा कि इस कानून के जरिए मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और पारिवारिक मामलों जैसे निकाह, तलाक, विरासत और उत्तराधिकार में हस्तक्षेप किया जा रहा है। बोर्ड का आरोप है कि इस्लामी शरीअत से जुड़े प्रावधानों को सीमित कर उनकी जगह अन्य सामाजिक अवधारणाएं लागू करने की कोशिश की जा रही है। बताया कि उत्तराखंड में लागू UCC को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है और मामला फिलहाल विचाराधीन है। उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका इस विषय पर संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप निर्णय देगी।
राजनीतिक समय पर भी उठे सवाल
यूसीसी को लागू किए जाने के समय को लेकर भी बोर्ड ने सवाल खड़े किए हैं। उनका मानना है कि चुनावों से पहले इस कानून को पारित करना राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिससे संवैधानिक प्रक्रिया पर असर पड़ता है। बोर्ड ने उत्तराखंड में मदरसों को लेकर लाए गए प्रावधानों पर भी कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि धार्मिक शिक्षा देने वाली संस्थाओं को सरकारी नियंत्रण में लाने की कोशिश धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के शैक्षिक अधिकारों का उल्लंघन है।
धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई पर आपत्ति
बयान में यह भी कहा गया कि राज्य में कई मस्जिदों और मजारों को दस्तावेज़ों के अभाव में हटाया जा रहा है, जो धार्मिक भावनाओं और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ है। बोर्ड ने इसे लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। बोर्ड ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सांप्रदायिक घटनाओं में पुलिस का रवैया निष्क्रिय रहता है और कई मामलों में शिकायत दर्ज करने में भी आनाकानी की जाती है।
सरकार से की ये मांगें
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मांग की है कि उत्तराखंड और गुजरात में UCC के क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसे व्यापक संवैधानिक समीक्षा के लिए भेजा जाए। साथ ही, किसी भी कानून में बदलाव से पहले सभी पक्षों से व्यापक परामर्श सुनिश्चित किया जाए। बोर्ड ने राज्य सरकारों को आगाह करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकारों का दायित्व है कि वे सभी नागरिकों के अधिकारों की बिना भेदभाव रक्षा करें। इतिहास उन्हीं सरकारों को याद रखता है जो न्याय, समानता और निष्पक्षता के साथ शासन करती हैं।
Copyright © 2024-25 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News