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इंडियन प्रीमियर लीग 2026 का सीजन जसप्रीत बुमराह के लिए अब तक किसी बुरे सपने जैसा रहा है. जिस गेंदबाज को डेथ ओवरों का सबसे भरोसेमंद हथियार माना जाता था, वही इस बार अपनी पहचान से जूझता दिख रहा है. आंकड़े चौंकाने वाले हैं- 10 मैचों में सिर्फ 3 विकेट, औसत 109.66 और स्ट्राइक रेट 74. ये वही बुमराह हैं, जिनके सामने दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाज आखिरी ओवरों में जोखिम लेने से बचते थे.
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह उनका कमजोर होता नियंत्रण नजर आता है. बुमराह की ताकत हमेशा उनकी सटीक लाइन-लेंथ और यॉर्कर रही है, लेकिन इस सीजन में वह बार-बार चूक रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण सोमवार को लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के खिलाफ मैच में देखने को मिला, जब उन्होंने एक ही ओवर में लगातार दो नो-बॉल फेंक दीं. दिलचस्प बात यह रही कि उसी ओवर में उन्होंने हिम्मत सिंह को आउट भी किया, लेकिन वह गेंद नो-बॉल निकली. बाद में हिम्मत सिंह ने 40 रन बनाकर टीम को 220 के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई,
नो-बॉल की बढ़ती संख्या खुद में एक बड़ी चिंता है. पूरे सीजन में बुमराह अब तक 8 नो-बॉल डाल चुके हैं, जो उनके स्तर के गेंदबाज के लिए असामान्य है. इस पर पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ऑन-एयर कहा, ‘मुझे बार-बार यह मत बताइए कि बुमराह ने नो-बॉल डाली है. यह स्वीकार्य नहीं है. आप एक प्रोफेशनल क्रिकेटर हैं, वाइड समझ में आता है, लेकिन नो-बॉल नहीं.’ गावस्कर की यह टिप्पणी साफ बताती है कि बुमराह से अपेक्षाएं कितनी ऊंची हैं और उनका मौजूदा प्रदर्शन उस कसौटी पर खरा नहीं उतर रहा.
बुमराह की गिरती प्रभावशीलता का एक और कारण उनकी यॉर्कर में आई कमी है. पहले उनकी यॉर्कर लगभग अचूक होती थी, लेकिन अब वह या तो फुल टॉस बन जा रही है या स्लॉट में आ रही है, जिसे बल्लेबाज आसानी से बाउंड्री के पार भेज रहे हैं. टी20 क्रिकेट में छोटी-सी गलती भी भारी पड़ती है और बुमराह के मामले में यही हो रहा है. परिणामस्वरूप, उनका इकोनॉमी रेट 8.89 तक पहुंच गया है, जो भले ही बहुत खराब न लगे… लेकिन उनके पुराने मानकों के मुकाबले यह काफी ज्यादा है.
इसके अलावा, अब बल्लेबाज भी बुमराह को पहले से बेहतर तरीके से पढ़ने लगे हैं. आधुनिक क्रिकेट में डेटा एनालिसिस ने गेंदबाजों की रणनीतियों को उजागर कर दिया है. बुमराह की रिलीज, एंगल और लेंथ को लेकर बल्लेबाज पहले से तैयार दिखते हैं. यही कारण है कि उनके खिलाफ डॉट बॉल्स कम हो गई हैं और दबाव बनाने की उनकी क्षमता घटी है.
मानसिक पहलू भी इस गिरावट में बड़ी भूमिका निभा रहा है. जब कोई गेंदबाज लगातार विकेट नहीं ले पाता, तो वह खुद पर अतिरिक्त दबाव डालने लगता है. बुमराह के साथ भी यही हो रहा है. वह हर गेंद को ‘परफेक्ट’ बनाने की कोशिश में ओवरथिंक कर रहे हैं, जिसका नतीजा नो-बॉल और गलत लेंथ के रूप में सामने आ रहा है. लखनऊ के खिलाफ मैच के दौरान जब कैमरा मुंबई इंडियंस के कोचिंग स्टाफ महेला जयवर्धने और लसिथ मलिंगा की ओर गया, तो उनकी निराशा साफ झलक रही थी.
टीम का संदर्भ भी बुमराह की फॉर्म पर असर डाल रहा है. मुंबई इंडियंस (MI) इस सीजन में लगातार बड़े स्कोर खा रही है, जिससे गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है. जब हर मैच में 200 से ज्यादा रन का पीछा करना या बचाव करना हो, तो गेंदबाज अक्सर आक्रामक की बजाय रक्षात्मक हो जाते हैं. इससे विकेट लेने की उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति प्रभावित होती है.
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि बुमराह का दौर खत्म हो गया है. क्रिकेट में फॉर्म अस्थायी होती है और क्लास स्थायी. बुमराह जैसे गेंदबाज के लिए एक अच्छा स्पेल ही काफी होता है वापसी के लिए. लेकिन फिलहाल IPL 2026 में तस्वीर साफ है- जो गेंदबाज कभी मैच का परिणाम तय करता था, वही आज खुद अपने खेल को संभालने के लिए संघर्ष कर रहा है.
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