झांसी: एक मशहूर कहावत है, “ना बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया.यह बात झांसी के एक गांव में सच साबित हो गई. यहां भाइयों ने पैसे के लिए मां-बाप को ही बांट लिया. जी हां, झांसी थाना रक्सा क्षेत्र के ग्राम इमलिया निवासी बुजुर्ग माता-पिता के लिए बीडा से मिलने वाला मुआवजा 2 करोड़ 85 लाख रुपये गले की फांस बन गया. मुआवजे की रकम में अधिक हिस्सेदारी के लालच में बेटों ने बुजुर्ग मां-बाप को बांट लिया. दो बड़े भाइयों ने बुजुर्ग पिता को अपने पास रख लिया जबकि बूढ़ी मां को दो छोटे भाइयों के पास रहने भेज दिया. इस बंटवारे से परेशान बुजुर्ग मां रक्सा थाना पहुंच कर पुलिस से शिकायत की और बताया कि रुपये के लालच में उनके बड़े बेटे ने पति को जबरन अपने साथ ले गया है. उन्होंने कहा कि पति को मार सकता है और पति से मिलाने की गुहार लगाई. पुलिस तहरीर के आधार पर मामले की छानबीन कर रही है.
दरअसल, बुजुर्ग किसान लक्ष्मी नारायण की इमलिया गांव में 23 एकड़ जमीन थी. यह पूरी जमीन बीडा ने अधिग्रहीत कर ली. जमीन के भू-स्वामी के तौर पर 95 वर्षीय बुजुर्ग किसान का नाम दर्ज है. मुआवजे के तौर पर उनको कुल 2 करोड़ 85 लाख रुपये मिलने हैं. इसमें 1 करोड़ 55 लाख रुपये उनके खाते में आ चुके हैं जबकि बाकी रुपये आना है. इतनी बड़ी रकम के आने से परिवार में विवाद छिड़ गया. बुजुर्ग ने 85 लाख चारों बेटों में बांट दिए.एक हिस्सा बुजुर्ग दंपती ने अपने पास रख लिया, लेकिन बेटों की निगाह 1 करोड़ 30 लाख रुपये पर है. दो बड़े बेटे रामबाबू भार्गव और देवेंद्र भार्गव ने भू-स्वामी होने के नाते सिर्फ पिता को अपने पास रख लिया है. छोटे भाई वीरेंद्र के हवाले मां को कर दिया.
छोटे भाई ने किया विरोध
बुजुर्ग किसान लक्ष्मी नारायण भार्गव के तीसरे नंबर के बेटे राजाराम ने बताया कि माता जी चाहती हैं कि पिता हमारे पास रहें, लेकिन बड़े भाई देवेंद्र जबरन पिताजी को अपने पास रखे हुए हैं. जबकि हिस्सा सभी भाइयों को बराबर-बराबर मिल गया है. एक भाई के हिस्से में 13 लाख 85 हजार के हिसाब से मिला है. पहले माताजी और पिताजी एक साथ रहते थे. अब पिताजी बड़े भाई देवेंद्र के पास रह रहे हैं और माताजी मध्य प्रदेश के दिनारा में छोटे भाई के साथ रह रही हैं.
मुआवजे के बाद बीड़ा का रोल खत्म
बीडा के ओएसडी डॉ. लालकृष्ण ने लोकल 18 को बताया कि जो जमीन किसान से ली जा रही है, वह आपसी समझौते के आधार पर रजिस्ट्री कराई जा रही है. सर्किल रेट से चार गुना पैसा किसान को दिया जा रहा है. लक्ष्मी नारायण की जो जमीन खरीदी गई थी, उसका मुआवजा का पैसा उनके खाते में दिया गया है. वह आपसी सहमति से किसी को पैसा दे सकते हैं, इससे बीडा का कोई मतलब नहीं होता है.