कर्ज में डूबे 34 देशों ने बनाया नया गठबंधन, पाकिस्तान को मिली अध्यक्षता, जानें कौन-कौन शामिल – Bharat24live

Shreeom Singh
Date: 14-10-26 10:32
दुनिया के कई विकासशील देश कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज से परेशान हैं. अब इन देशों ने अपनी समस्याओं को मिलकर हल करने के लिए एक नया संगठन बनाया है. इस मंच में कुल 34 देश शामिल हैं और इसकी अध्यक्षता पाकिस्तान को सौंपी गई है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब अगले एक साल तक इस संगठन के अध्यक्ष रहेंगे. संयुक्त राष्ट्र की संस्था UNCTAD के सहयोग से बने इस मंच पर देश कर्ज से जुड़ी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा करेंगे.
इस संगठन को बनाने की प्रक्रिया अप्रैल 2026 में शुरू हुई थी. शुरुआत में मिस्र को अंतरिम अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी. अब सदस्य देशों की सहमति से पाकिस्तान को इसकी कमान सौंपी गई है. इस मंच का मकसद विकासशील देशों को कर्ज के बेहतर प्रबंधन और आर्थिक मुश्किलों से निपटने में मदद करना है.
कर्जदार देशों के संगठन में कौन-कौन शामिल हैं?
UNCTAD के मुताबिक, इस संगठन में कुल 34 देश शामिल हैं. इनमें पाकिस्तान और मिस्र के अलावा दक्षिण अफ्रीका, फिजी, सीरिया, सूडान, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, सेंट लूसिया, सिएरा लियोन, नामीबिया और मॉरिटानिया जैसे देश शामिल हैं.
इसके अलावा मालदीव, मेडागास्कर, लेबनान, लेसोथो, केन्या, जॉर्डन, होंडुरास, गिनी, घाना, गैबॉन, इस्वातिनी, इक्वाडोर और कांगो भी इस समूह का हिस्सा हैं. बारबाडोस और भूटान जैसे देशों ने भी इस मंच में जगह बनाई है.
पाकिस्तान खुद भी भारी सरकारी कर्ज के बोझ से जूझ रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में देश का कुल सार्वजनिक कर्ज करीब 81.4 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये यानी लगभग 293 अरब डॉलर था. इसमें देश के भीतर से लिए गए कर्ज के साथ विदेशी कर्ज भी शामिल है.
एक साल तक पाकिस्तान संभालेगा संगठन की कमान
बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, थाईलैंड में हुई बैठक के दौरान पाकिस्तान को एक साल के लिए संगठन का अध्यक्ष चुना गया. जिम्मेदारी मिलने के बाद पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने कर्ज से जुड़ी समस्याओं को दूर करने और देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया.
उनका कहना है कि सदस्य देशों को कर्ज के बेहतर प्रबंधन के लिए अपनी नीतियों को मजबूत करना चाहिए. इसके साथ ही एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने और विकास से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पैसे जुटाने के नए तरीके खोजने की जरूरत है.
इस मंच के जरिए विकासशील देश कर्ज चुकाने की मुश्किलों पर चर्चा कर सकेंगे और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए मिलकर काम कर सकेंगे.
कर्ज का ब्याज चुकाने में निकल रहा विकासशील देशों का पैसा
UNCTAD के मुताबिक, विकासशील देशों पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है. इन देशों को कर्ज पर भारी ब्याज चुकाना पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में विकासशील देशों ने कर्ज के ब्याज के रूप में करीब 1 लाख करोड़ डॉलर चुकाए. यह रकम 2010 के मुकाबले लगभग तीन गुना है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि विकासशील देशों के लिए कर्ज लेना विकसित देशों की तुलना में महंगा पड़ता है. विकासशील देश सार्वजनिक कर्ज पर औसतन 5.2 प्रतिशत ब्याज देते हैं, जबकि विकसित देशों के लिए यह दर करीब 2.2 प्रतिशत है.
इसका असर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी जरूरी सेवाओं पर भी पड़ रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, ऐसे देशों में करीब 3.7 अरब लोग रहते हैं, जहां सरकारें सार्वजनिक कर्ज का ब्याज चुकाने पर स्वास्थ्य या शिक्षा से ज्यादा पैसा खर्च करती हैं. ऐसे में नए संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्ज का बोझ कम करने और विकास के लिए जरूरी संसाधन जुटाने की होगी.
भारत 24 लाइव — भारत का विश्वसनीय हिंदी समाचार पोर्टल। ताज़ा खबरें, विश्लेषण, वीडियो।
लाइव भारत 24 ऐप डाउनलोड करें और लाइव समाचार देखें

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News