कहां गए भारत के आसमान से बादल? अब इतने दिन बाद सक्रिय होगा मॉनसून, क्यों 3 नई सैटेलाइट तस्वीरों ने बढ़ा दी मौ – India.Com

Monsoon Tracer: बारिश का इंतजार कर रहे देश के किसानों के लिए अच्छी खबर नहीं है. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून भारत के और हिस्सों में आगे बढ़ रहा है, लेकिन मॉनसून की व्यापक बारिश कम से कम एक और हफ्ते तक धीमी रहने की संभावना है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 23 जून के आसपास ही अच्छी बारिश शुरू होगी.

आईएमडी ने कहा है कि तकनीकी रूप से मॉनसून मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ रहा है. कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पूर्वोत्तर भारत, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, केरल और पुडुचेरी में ये सक्रिय है. अगले चार से पांच दिनों में महाराष्ट्र के और हिस्सों, कर्नाटक के बाकी इलाकों, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल बने हुए हैं.

मॉनसून मैप पर तो आगे बढ़ रहा है लेकिन बारिश नहीं हो रही है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बारिश लाने वाला सिस्टम असामान्य रूप से कमज़ोर बना हुआ है. 15 जून से 21 जून के बीच बड़े पैमाने पर मॉनसून की गतिविधि के काफी हद तक सुस्त रहने की उम्मीद है.
बारिश में कमी का एक अन्य कारण ऊपरी वायुमंडल में हवा की धारा को बताया जा रहा है. वेस्टर्ली जेट स्ट्रीम’ नाम की यह धारा सामान्य से कहीं ज्यादा दक्षिण की ओर खिसक गई है.

आने वाले हफ्ते में व्यापक मॉनसून बारिश के बजाय, ज़्यादातर बारिश स्थानीय स्तर पर होने वाले तूफ़ान (थंडरस्टॉर्म) से होने की उम्मीद है, खासकर दक्षिण भारत में. कर्नाटक-आंध्र प्रदेश-तमिलनाडु सीमावर्ती क्षेत्र और पूर्वी घाट में अक्सर तूफान की गतिविधि देखने को मिल सकती है, जिससे कुछ जगहों पर मध्यम से भारी बारिश की संभावना है.
22 जून से 28 जून के बीच कर्नाटक के अंदरूनी इलाकों, आंध्र प्रदेश-कर्नाटक सीमावर्ती क्षेत्र, दक्षिणी तमिलनाडु और केरल के पश्चिमी घाट में तूफ़ान (थंडरस्टॉर्म) की गतिविधि तेज होने की उम्मीद है. कई मौसम मॉडलों से संकेत मिलता है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 29 जून से 5 जुलाई के बीच फिर से जोर पकड़ सकता है. दक्षिणी केरल के पश्चिमी घाट और कोंकण तट पर सबसे पहले मॉनसून के तेज होने और भारी बारिश होने की संभावना है.
ग्लोबल और भारतीय मौसम एजेंसियों की नई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि भारत के बड़े हिस्सों में मॉनसून के बादल असामान्य रूप से कम हैं. इस पैटर्न ने लंबे समय तक बारिश की कमी को लेकर चिंता बढ़ा दी है. यूरोप (यूरोपीय मौसम सैटेलाइट ‘मेटियोसैट इंडियन ओशन डेटा कवरेज), अमेरिका के NOAA और इसरो के (‘INSAT-3DS’) सैटेलाइट से ये तस्वीरें ली गई हैं.

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Vineet Sharan Srivastava एक भारतीय पत्रकार और डिजिटल न्यूज एक्सपर्ट हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 17 वर्षों का अनुभव है. वह असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं … और पढ़ें
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