कानपुर गैंगरेप केस: दो घंटे तक दरोगा की कार के अंदर से चिल्लाती रही लड़की, किसी ने नहीं सुनी चीख – AajTak

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कानपुर का यह केस ना केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पुलिस की छवि को भी झकझोर कर रख देता है. एक नाबालिग लड़की के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की इस घटना ने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे जो परतें खुलीं, वे और ज्यादा डराने वाली साबित हुईं. आरोप है कि इस घिनौनी वारदात में कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि खुद कानून का रक्षक शामिल था.
घटना सचेंडी थाना क्षेत्र की है. पीड़िता के मुताबिक, रविवार रात करीब 10 बजे वह घर से बाहर निकली थी. उसी दौरान एक काले रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी उसके पास आकर रुकी. गाड़ी में सवार दो युवकों ने अचानक उसे दबोच लिया और जबरन कार के अंदर खींच लिया. पीड़िता कुछ समझ पाती, उससे पहले ही गाड़ी तेज रफ्तार में अंधेरे की ओर बढ़ चुकी थी. आरोप है कि कार सवार युवक उसे सचेंडी इलाके में रेलवे ट्रैक के पास स्थित एक सुनसान स्थान पर ले गए. वहां गाड़ी को खड़ा कर दिया गया. कार के शीशे बंद थे, बाहर सन्नाटा पसरा हुआ था. पीड़िता का आरोप है कि करीब दो घंटे तक कार के अंदर उसके साथ दरिंदगी की गई. वह मदद के लिए चिल्लाती रही, गिड़गिड़ाती रही, लेकिन बंद शीशों और सुनसान इलाके के कारण उसकी चीखें बाहर तक नहीं पहुंच सकीं. दो घंटे तक वह हर पल मौत से जूझती रही.
आरोप है कि इस वारदात में भीमसेन चौकी प्रभारी दरोगा अमित मौर्या की सीधी भूमिका रही. जांच में सामने आया है कि स्कॉर्पियो गाड़ी दरोगा की ही थी और उसी में नाबालिग के साथ गैंगरेप किया गया. आरोप है कि दरोगा ने शिवबरन नाम के एक कथित पत्रकार के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया. वारदात के बाद जब पीड़िता की हालत बेहद खराब हो गई और वह पूरी तरह टूट चुकी थी, तब आरोपी उसे देर रात उसके घर के पास छोड़कर फरार हो गए. किसी तरह हिम्मत जुटाकर वह घर पहुंची और परिजनों को आपबीती सुनाई. परिवार पर जैसे पहाड़ टूट पड़ा. पीड़िता के भाई ने बिना देरी किए डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी.
शुरू में टाल मटोल करती रही लड़की 
आरोप है कि पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता व उसके भाई को भीमसेन चौकी ले जाया गया, लेकिन शुरुआती स्तर पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया. पीड़िता नाबालिग होने के बावजूद तत्काल पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया. परिवार का आरोप है कि क्योंकि मामले में एक पुलिसकर्मी का नाम सामने आ रहा था, इसलिए कार्रवाई में जानबूझकर देरी की गई. जब यह मामला  वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, तब जाकर सचेंडी थाने में एफआईआर दर्ज की गई. हालांकि इसमें भी पीड़िता पक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं. एफआईआर में नामजद आरोपियों के बजाय दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की धाराएं लगाई गईं. 
इस बीच पीड़िता के भाई ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया. वीडियो में उसने साफ तौर पर कहा कि घटना में शामिल लोगों में एक पुलिसकर्मी भी था, जो वर्दी में मौजूद था. वीडियो सामने आते ही मामला तूल पकड़ गया और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. प्रारंभिक जांच में लापरवाही और संदिग्ध भूमिका सामने आने पर सचेंडी थाना प्रभारी विक्रम सिंह को निलंबित कर दिया गया. वहीं आरोपी दरोगा अमित मौर्या को भी सस्पेंड कर दिया गया है. हालांकि वह घटना के बाद से फरार है. दरोगा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने चार विशेष टीमें बनाई हैं, जो लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं. पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी दरोगा के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस की जा रही है और उसके करीबी संपर्कों पर भी नजर रखी जा रही है.
आरोपी पत्रकार गिरफ्तार  
इस मामले में एक और आरोपी, कथित पत्रकार शिवबरन, को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उससे पूछताछ जारी है और उसके बयान के आधार पर कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है. पुलिस का दावा है कि जांच में कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो. मामले को लेकर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि आरोपी पुलिसकर्मी को जल्द गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा. डीसीपी वेस्ट दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि पीड़िता पक्ष की तहरीर के आधार पर गैंगरेप का मुकदमा दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जा रही है. 
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