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मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में पिछले 8 दिनों के भीतर एक दिल दहला देने वाला घटनाक्रम सामने आया है. यहां एक ही परिवार की बाघिन और उसके 4 शावकों की मौत ने हड़कंप मचा दिया है. सरही परिक्षेत्र में शुरू हुआ मौतों का यह सिलसिला अब मुक्की क्वारंटाइन सेंटर तक पहुंच गया है, जहां बाघिन ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. 21 अप्रैल से शुरू हुआ मौतों का सिलसिला…
21 अप्रैल: अमाही नाला के पास 16 माह के एक नर शावक का शव मिला. पोस्टमॉर्टम में पता चला कि शावक का पेट पूरी तरह खाली था.
23 अप्रैल: एक और नर शावक की मौत की खबर आई. डॉग स्क्वाड और हाथियों की मदद से छानबीन की गई, लेकिन वजह साफ नहीं हुई.
तीसरी मौत: जल्द ही एक मादा शावक का शव भी बरामद हुआ.
भोपाल से पहुंची प्रधान मुख्य वन्यप्राणी संरक्षक समिता राजौरा ने बताया कि शुरुआती रिपोर्ट में रेस्पिरेटरी लंग्स इन्फेक्शन (फेफड़ों का संक्रमण) पाया गया है.
बचाने की कोशिश हुई नाकाम
लगातार तीन शावकों को खोने के बाद पार्क प्रबंधन ने बड़ा फैसला लिया. 9 वर्षीय मां बाघिन और उसके एकमात्र जीवित बचे नर शावक को सरही रेंज से ट्रेंकुलाइज कर मुक्की क्वारंटाइन सेंटर भेजा गया.
विशेषज्ञों की निगरानी में इलाज शुरू हुआ, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. इलाज के दौरान बाघिन और चौथे शावक की भी मौत हो गई.
क्या ‘भूख’ बनी मौत की असली वजह?
हालांकि, आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन सूत्रों के अनुसार भुखमरी ही इस त्रासदी का मूल कारण लग रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मां बाघिन संभवतः बीमार होने के कारण शिकार नहीं कर पा रही थी. 2 साल से कम उम्र के शावक पूरी तरह मां के किए गए शिकार पर निर्भर होते हैं.
कई दिनों तक भोजन न मिलने के कारण शावकों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी खत्म हो गई और वे संक्रमण का शिकार होकर दम तोड़ते चले गए.
फिलहाल एकमात्र जीवित नर शावक का इलाज चल रहा है, जिसकी स्थिति पर वन्यजीव विशेषज्ञ लगातार नजर बनाए हुए हैं.
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