लेखिका एवं निर्देशक करेन क्षिति सुवर्णा की पहली फीचर फिल्म ‘सितंबर 21’ का विश्व प्रीमियर 16 मई को कान फिल्म महोत्सव के ‘मार्चे डू फिल्म’ में होगा। हिंदी और कन्नड़ में बनी यह फिल्म अल्जाइमर के एक मरीज पर केंद्रित है, जिसे लगता है कि उसकी पत्नी कोविड-19 के कारण बगल के घर में पृथकवास में है, जबकि उसका अलग रह रहा बेटा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और कर्तव्य के बीच द्वंद्व के साथ घर लौटता है। सुवर्णा ने कहा कि यह जितनी डिमेंशिया रोगियों की देखभाल करने वालों के बारे में है, उतनी ही स्वयं रोगियों के बारे में भी है। निर्देशक ने एक बयान में कहा, ‘देखभाल करने वालों के संघर्ष अल्जाइमर रोगियों के संघर्षों से कहीं अधिक हैं।’ इस फिल्म में प्रवीण सिंह सिसोदिया अल्जाइमर से पीड़ित पिता की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म की कहानी राजशेखर ने लिखी है और संगीत विनय चंद्र ने दिया है।
दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से ‘द ट्रिब्यून’ का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है।
‘द ट्रिब्यून’ के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।