भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के दोहरे मापदंडों को उजागर किया, जिसमें कारगिल युद्ध में अपने सैनिकों के शव …और पढ़ें
यूएन में भारत ने पाकिस्तान को फिर लगाई लताड़। (फोटो- एएनआई।)
पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध में अपने सैनिकों के शव लेने से इनकार किया।
भारत ने दाऊद इब्राहिम को पनाह देने पर पाकिस्तान को घेरा।
पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी का कोई नैतिक अधिकार नहीं।
डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। आतंकवाद, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान के दोहरे मापदंड एक बार फिर सबके सामने आए हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ठोस सबूत दिखाते हुए एक बार फिर याद दिलाया है कि पाकिस्तान के पास भारत के जम्मू-कश्मीर और उसके आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने अन्य वरिष्ठ भारतीय राजनयिकों के साथ मिलकर धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक (स्पेशल रैपोर्टियर) के साथ एक संवाद में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने ऐसे अकाट्य सबूत और तथ्य पेश किए जिनसे पता चलता है कि 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान मारे गए अपने सैनिकों के शवों को लेने से पाकिस्तान ने इनकार कर दिया था।
मंगलानंदन ने कहा, “यह बड़े ही विरोधाभास की बात है कि जो देश 1999 में कारगिल की लड़ाई में मारे गए अपने ही सैनिकों के शवों को लेने तक के लिए तैयार नहीं था, वह आज आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और दफनाने की प्रथाओं पर इतने जोश के साथ बात कर रहा है। मैं उन्हें याद दिलाना चाहती हूं कि भारतीय सेना ने ही कई पाकिस्तानी सैनिकों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ और इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार दफनाया था।”
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि विशेष प्रतिवेदक (स्पेशल रैपोर्टियर) की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल ही नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान को भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हो रही घटनाओं को लेकर जो इतनी गहरी दिलचस्पी है, उसे असल में उन इलाकों पर ध्यान देना चाहिए जो उसके अवैध कब्जे में हैं, जैसे कि रावलकोट। पाकिस्तान में कई अल्पसंख्यक समुदायों की आबादी घट रही है और उनके अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। जो देश अपने खुद के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता उसे भारत को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”
इस हफ्ते की शुरुआत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-रोधी और मानवाधिकार मामलों के विशेष प्रतिवेदक की एक रिपोर्ट में मौजूद गंभीर तथ्यात्मक गलतियों की ओर इशारा किया। भारत ने झूठ पेश करने के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।
भारत के खिलाफ पाकिस्तान के नैरेटिव को लेकर दिखाई गई चुनिंदा भूलने की बीमारी को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।
पुरी ने कहा, “यह व्यक्ति (दाऊद इब्राहिम) 2003 में सूची में शामिल किए जाने से काफी पहले ही भारत से भाग गया था। इसी दौरान किसी दूसरे देश में रहते हुए उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से जुड़े होने के कारण इस सूची में डाला गया था।” यहां साफतौर पर पुरी का इशारा पाकिस्तान की ओर था।
पुरी ने कहा, “आज भी वह मेरे देश में एक वांछित अपराधी है। संयुक्त राष्ट्र की सूची के अनुसार, वह उसी देश में रहता है जहां ओसामा बिन लादेन मिला था और मारा गया था।”
साथ ही कोविड-19 महामारी के दौरान हुई मौतों के संदर्भ में मंगलानंदन ने सवाल उठाया कि विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट में इस बात का कोई जिक्र क्यों नहीं है कि विकसित देशों में क्या हुआ था।
उन्होंने कहा, “अध्यक्ष महोदय, रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 के दौरान भेदभाव और गलत प्रथाएं कथित तौर पर केवल ग्लोबल साउथ में ही हुईं। विकसित देशों में भी ऐसी ही दुखद स्थितियां थीं, जिनका जिक्र न करके इस रिपोर्ट को क्या फायदा मिलता है?”
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