Bangladesh First Woman Prime Minister: बांग्लादेश की राजनीति से मंगलवार सुबह एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन खालिदा जिया का 80 साल की उम्र में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि BNP ने आधिकारिक बयान जारी कर की। इस खबर के बाद बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों में भी शोक की लहर दौड़ गई।
BNP के मीडिया सेल के अनुसार, खालिदा जिया का निधन मंगलवार सुबह करीब 6 बजे, फज्र की नमाज़ के ठीक बाद हुआ। वह पिछले कई हफ्तों से ढाका के एवरकेयर अस्पताल में भर्ती थीं। उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी और वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थीं।
खालिदा जिया लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। उन्हें लिवर सिरोसिस, डायबिटीज, गठिया, दिल और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं थीं। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें नियमित किडनी डायलिसिस की जरूरत पड़ रही थी। जब भी डायलिसिस रोका जाता, उनकी हालत और बिगड़ जाती थी। 11 दिसंबर को उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर भी रखा गया था।
खालिदा जिया का जन्म 1946 में तत्कालीन अविभाजित दिनाजपुर जिले के जलपाईगुड़ी में हुआ था। उनकी शादी बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान से हुई थी। जब जियाउर रहमान राष्ट्रपति बने, तब खालिदा जिया फर्स्ट लेडी थीं। 1981 में जियाउर रहमान की हत्या के बाद खालिदा जिया राजनीति में सक्रिय हुईं। उन्होंने BNP की एक साधारण सदस्य के रूप में शुरुआत की और कुछ ही वर्षों में पार्टी की चेयरपर्सन बन गईं।
खालिदा जिया ने 1991 में पहली बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उन्होंने कुल तीन बार प्रधानमंत्री पद संभाला-दो बार पूरे पांच साल और एक बार कुछ महीनों के लिए। 1983 में उन्होंने तत्कालीन सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद के खिलाफ सात-पार्टी गठबंधन बनाने में अहम भूमिका निभाई।
खालिदा जिया का भारत से राजनीतिक और मानवीय दोनों तरह का संबंध रहा। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी और दिल्ली से हर संभव मदद की पेशकश की थी। इस पर BNP ने भारत सरकार का आभार भी जताया था।
खालिदा जिया और शेख हसीना के बीच दशकों पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है। दोनों नेताओं का संघर्ष बांग्लादेश की राजनीति की सबसे चर्चित कहानियों में से एक रहा। खालिदा जिया को शेख हसीना की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जाता था।
खालिदा जिया के निधन के बाद BNP के भविष्य और बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलावों की चर्चा शुरू हो गई है। एक युग का अंत हो चुका है, लेकिन उनके फैसले और राजनीतिक विरासत आने वाले वर्षों तक याद की जाती रहेगी।
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