पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता के दृष्टिगत रेलवे बोर्ड स्टेशनों पर कूड़ा प्रबंधन को लागू कर मॉडल स्टेशन बनाएगा। इसलिए रेलवे स्टेशनों से निकलने वाले कूड़ा निस्तारण को लेकर एक सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जिसमें स्टेशनों से निकलने वाले सभी प्रकार के कूड़ा की नियमित रिपोर्ट तैयार होगी। इसके बाद नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों से संपर्क कर कूड़ा का निस्तारण व्यवस्था को लागू कराया जाएगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है, बरेली जंक्शन, मुरादाबाद, गाजियाबाद, हरदोई, शाहजहांपुर, हरिद्वार, मेरठ, देहरादून, रामपुर, सहारनपुर आदि बड़े रेलवे स्टेशनों आदि पर नियमित कुंतलों कूड़ा निकलता है। कूड़ा सूखा, गीला आदि प्रकार का होता है।
स्टेशनों पर कूड़ा निस्तारण के लिए एसटीपी नहीं हैं। कूड़ा को रेलवे ढलाव घरों पर फिकवाता है, जिससे गंदगी फैलती और पर्यावरण के लिए भी खतरा है। इसलिए कूड़ा प्रबंधन को लेकर रेलवे स्टेशनों से लगे नगर निगम, नगर पंचायतों, नगर पालिकाओं से अनुबंध करेगा। बरेली जंक्शन पर नियमित तीन ट्राली कूड़ा निकलता है। यानि एक ट्राली में करीब तीन से चार कुंतल कूड़ा आता। रोज करीब 9 से 10 कुंतल कूड़ा प्लेटफार्मों, वाशिंग लाइन, सर्कुलेटिंग एरिया और आफिसों से निकलता है। इस कूड़ा को एसटीपी पर भेजकर निस्तारित किया जाएगा। रेलवे बोर्ड के निर्देशन में डिवीजन स्तर पर नियमित निकलने वाले कूड़ा की टीम के द्वारा मॉनीटरिंग रिपोर्ट बनाई जा रही है। जिससे स्टेशनों पर कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था को लागू कराकर मॉडल स्टेशन बनाए जा सकें।रेल अधिकारियों का कहना है, रेलवे स्टेशनों पर कूड़ा प्रबंधन को लागू किया जाना है। जिससे स्टेशनों को मॉडल स्टेशन बनाया जा सके। अभी रेलवे स्टेशनों से निकालने वाले कूड़ा की मॉनीटरिंग कराई जा रही है। सूखा-गीला कूड़ा कितना कितना निकलता है। कूड़ा का निस्तारण नगर पालिकाओं, नगर निगम, नगर पंचायतों के माध्यम से किया जाएगा।
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