कृति के लिए स्पष्ट सोच विकसित करना जरूरी – Live Hindustan

वाराणसी, मुख्य संवाददाता। कोई भी चित्र हम क्यों बना रहे हैं, जब तक कलाकार के मन में यह स्पष्ट नहीं होगा, तब तक वह अपनी कृति के साथ न्याय नहीं कर सकेगा। अपनी कृति को लेकर हर कलाकार को स्पष्ट सोच विकसित करनी ही चाहिए। इसके अभाव में उनकी रचना प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। ये बातें नागरी नाटक मंडली में वरिष्ठ चित्रकार बीएचयू के दृश्य कला संकाय की पूर्व डीन प्रो. मृदुला सिन्हा ने कहीं। वह शनिवार को नागरी नाटक मंडली न्यास एवं अभ्युदय संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला ‘मुखड़ा-03’ के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि बनारस एक ऐसी जगह है जो पूरी दुनिया से सृजनकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। विभिन्न विधाओं से जुड़ी बड़ी-बड़ी हस्तियां खामोशी से यहां आती हैं, सृजन करती हैं और चुपचाप लौट जाती हैं। यह कोई सामान्य बात नहीं है। इस सत्र में नागरी नाटक मंडली न्यास के अध्यक्ष डॉ. संजय मेहता, सचिव डॉ. अजित सैगल, वन प्लेस टेक्नोलॉजी की निदेशक वर्षा सिंह, एनएसडी की प्रो. प्रेमा सिंह, अवधेश सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।कार्यशाला संयोजक डॉ. शारदा सिंह ने बताया कि तीन दिवसीय कार्यशाला 22 जून तक चलेगी। इसमें नगर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के अलावा स्वतंत्र चित्रकारों सहित कुल 110 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं। ये चित्रकार काशी के अनेक विद्वानों, संगीतज्ञों, रंगधर्मियों, लोककलाकारों और सांस्कृतिक पुरोधाओं के चित्रों का निर्माण करेंगे। संचालन सुजीत चौबे एवं धन्यवाद ज्ञापन निहारिका सिंह ने किया।
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