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अर्नेस्ट एंड यंग (ईवाई) को उम्मीद है कि आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत व्यय में कम-से-कम 20 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी.ईवाई इंडिया में मुख्य नीतिगत सलाहकार डी के श्रीवास्तव ने कहा कि चुनौतीपूर्ण आर्थिक परिदृश्य के बीच आगामी बजट में राजकोषीय संयम को वृद्धि उपायों के साथ संतुलित करना चाहिए.डीबीएस की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि केंद्र सरकार राजकोषीय समेकन के रास्ते पर टिके रहकर और लोकलुभावन उपायों से दूर रहकर व्यापक स्थिरता को प्राथमिकता दे सकती है.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गरीब और मध्यम वर्ग के उत्थान के लिए धन की देवी का आह्वान करने के बाद आयकर में राहत मिलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं. खासकर निम्न मध्यम वर्ग को बजट में कुछ राहत मिल सकती है.डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि पहली तिमाही के आंकड़े निजी खपत में उल्लेखनीय वृद्धि और निवेश गतिविधि में मामूली सुधार की ओर इशारा करते हैं.उन्होंने कहा कि भारत में चुनाव संपन्न होने के साथ अनुमान है कि सरकारी खर्च बढ़ेगा, जिससे आगामी तिमाहियों में वृद्धि को समर्थन मिलेगा.उन्होंने कहा कि सरकार कौशल विकास और रोजगार सृजन की दिशा में प्रयासों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी.
वित्त मंत्री राजकोषीय घाटे को कम करने के मसौदे पर टिके रहते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में कमजोर पड़ती आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के उपाय भी कर सकती हैं.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अपना लगातार आठवां बजट पेश करेंगी, जिसमें महंगाई और स्थिर वेतन वृद्धि से जूझ रहे मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए आयकर दरों/स्लैब में कटौती या बदलाव की उम्मीद की जा रही है. वित्त मंत्री राजकोषीय घाटे को कम करने के मसौदे पर टिके रहते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में कमजोर पड़ती आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के उपाय भी कर सकती हैं.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज देश का आम बजट पेश करेंगी. अब वैसे तो शनिवार को शेयर बाजार बंद होता है. लेकिन बजट पेश हो रहा है इसलिए शेयर बाजार खुला रहेगा. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने एक सर्कुलर जारी करके जानकारी दी कि इस दिन ट्रेडिंग सामान्य समय पर सुबह 9:15 से 3:30 बजे तक होगी.
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आज पेश बजट करेंगी. सेंट्रल फाइनांस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण दिन के 11 बजे लोकसभा में अपना बजट भाषण शुरू करेंगी. नियमों के अनुसार निचले सदन में बजट स्पीच के बाद दस्तावेजों को ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में रखा जाएगा.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लगातार आठवें बजट में उच्च कीमतों और स्थिर वेतन वृद्धि से जूझ रहे मध्यम वर्ग के बोझ को कम करने के लिए आयकर दरों/स्लैब में कटौती या बदलाव की व्यापक रूप से उम्मीद की जा रही है. 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष के बजट में कमजोर आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के साथ-साथ राजकोषीय रूप से विवेकपूर्ण उपाय शामिल होने की उम्मीद है. यह राजकोषीय घाटे को कम करने के रोडमैप पर टिके रहने के साथ-साथ खपत को बढ़ावा देने के कदमों पर ध्यान केंद्रित करने की संभावना है.
डेलॉइट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के शनिवार को पेश होने वाले बजट में करदाताओं, खासकर निम्न मध्यम वर्ग के करदाताओं को राहत मिल सकती है, क्योंकि नरेंद्र मोदी सरकार बंद हो रही अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उपभोग को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को कहा कि भू-राजनीतिक और नीतिगत अनिश्चितताओं के बीच वैश्वीकरण का स्वर्णिम दौर शायद खत्म हो रहा है जिसके चलते वृद्धि में सुस्ती आई है. बजट से पहले संसद में पेश आर्थिक समीक्षा के मुताबिक, आने वाले वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 6.3-6.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है. यह वृद्धि दर विकसित देश बनने के लिए जरूरी आठ प्रतिशत वृद्धि से बहुत कम है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट को अंतिम रूप दिया. उम्मीद है कि इसमें मध्यम वर्ग की कर कटौती की आकांक्षा और वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए अर्थव्यवस्था की जरूरतों के बीच संतुलन स्थापित किया जाएगा.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण शनिवार को अपना लगातार आठवां बजट पेश करेंगी जिसमें महंगाई और स्थिर वेतन वृद्धि से जूझ रहे मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए आयकर दरों/स्लैब में कटौती या बदलाव की उम्मीद की जा रही है. वित्त मंत्री राजकोषीय घाटे को कम करने के मसौदे पर टिके रहते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में कमजोर पड़ती आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के उपाय भी कर सकती हैं.
बजट से पहले आर्थिक सर्वे आता है. ये एक तरह से देश की अर्थव्यवस्था का ECG होता है, जो आर्थिक सेहत की जानकारी देता है, जैसे ECG से हमारे दिल की सेहत का अंदाजा लगता है, वैसे ही आर्थिक सर्वे. देश की अर्थव्यवस्था की सेहत का सूचक है. इसमें इस बात के भी संकेत रहते हैं कि आगे कौन सी नीतियां सरकार को अपनानी चाहिए.
वित्त मंत्री ने ये बताया कि खराब मौसम, सप्लाई चेन में बाधा के कारण महंगाई बढ़ी है. साल 2024 की आखिरी तिमाही यानी जनवरी, फरवरी और मार्च में महंगाई में कमी होगी.
साल 2025 में सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है तो चांदी की कीमतों में वृद्धि हो सकती है. संसद में पेश आर्थिक सर्वे 2024-25 में विश्व बैंक के जिंस बाजार परिदृश्य का हवाला देते हुए, इस बात पर रोशनी डाली गई कि जिंसों की कीमतों में 2025 में 5.1 फीसदी और साल 2026 में 1.7 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है. अनुमानित गिरावट तेल की कीमतों की वजह से है, लेकिन प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी तथा धातुओं एवं कृषि कच्चे माल के लिए स्थिर दृष्टिकोण से यह कम हो गई है.
आर्थिक सर्वे में आगे कहा गया है कि सोने की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद है, जबकि चांदी की कीमतें और बढ़ सकती हैं. धातुओं और खनिजों की कीमतों में गिरावट आ सकती है.
शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी के बीच आर्थिक सर्वे रिपोर्ट 2024-25 में कहा गया है कि अमेरिकी बाजारों में किसी भी गिरावट का भारत पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है. वित्तीय वर्ष 2019-20 में जहां खुदरा निवेशकों की भागीदारी 4.9 करोड़ थी जो 31 दिसंबर, 2024 तक बढ़कर 13.2 करोड़ हो गई. सर्वे के अनुसार, अमेरिका में ऊंचे मूल्यांकन और आशावादी बाजार धारणाओं को देखते हुए अगले वित्तीय वर्ष में बाजार में एक बड़ी गिरावट की संभावना बनी हुई है. यदि ऐसी गिरावट आती है तो भारत में भी व्यापक असर पड़ सकता है.
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश का अप्रैल से दिसंबर तक का राजकोषीय घाटा पूरे साल के लक्ष्य का 56.7% रहा. अप्रैल से नवंबर राजकोषीय घाटा 8.47 लाख करोड़ रुपये था, जो साल-दर-साल बढ़कर वित्त वर्ष 2025 के लक्ष्य का 52.5% हो गया.
आर्थिक समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर कर छूट और नवीकरणीय ऊर्जा पर सब्सिडी लोगों को कम कार्बन उत्सर्जन वाली जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है. कम कार्बन वाली जीवन शैली को बढ़ावा देने के कई प्रभावी उपाय हैं. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की उत्सर्जन अंतर रिपोर्ट-2020 में सार्थक जीवन शैली में बदलाव को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख रणनीतियों की रूपरेखा के साथ सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए कदम सुझाए गए हैं.
हफ्ते में 70 से 90 घंटे तक लगातार काम करने को लेकर जारी बहस के बीच आर्थिक सर्वे ने अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि इससे हेल्थ पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. सर्वे में कहा गया कि अपने डेस्क पर लंबे समय तक समय बिताना मेंटल हेल्थ के लिए हानिकारक है और जो व्यक्ति डेस्क पर रोजाना 12 या उससे अधिक समय बिताता है, उसे मेंटल हेल्थ संबंधी समस्याओं से जूझना पड़ता है. 55 से 60 घंटे से अधिक काम करने का सेहत पर प्रतिकूल असर हो सकता है.
आर्थिक समीक्षा 2024-25 में कहा गया है कि साल 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए कई अहम क्षेत्रों में निजी निवेश बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि सिर्फ सरकारी वित्त पोषण के जरिए जरूरी बुनियादी ढांचा नहीं तैयार किया जा सकता है. देश के बुनियादी ढांचे को आगे ले जाने की मांग को अकेले सार्वजनिक पूंजी ही पूरा नहीं कर सकती है.
आर्थिक समीक्षा 2024-25 में कहा गया है कि इनोवेशन, नई दवा विकास और बायो फार्मास्युटिकल्स पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है क्योंकि भारत में अनुसंधान और विकास (R&D) पर खर्च अब भी दुनिया के अन्य अग्रणी देशों से काफी कम है. पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में फार्मास्युटिकल्स का कुल वार्षिक कारोबार 4.17 लाख करोड़ रुपये रहा. पिछले 5 सालों में इसमें औसतन 10.1 फीसदी की वृद्धि हुई है. फार्मा क्षेत्र में कुल कारोबार में निर्यात का हिस्सा 50 फीसदी रहा, जिसकी वैल्यू वित्त वर्ष 2023-24 में 2.19 लाख करोड़ रुपये रहा था. फार्मास्युटिकल्स का कुल आयात 58,440.4 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था.
आर्थिक सर्वे 2024-25 के अनुसार, सितंबर, 2024 तक दर्ज कुल पेंशन अंशधारकों में अटल पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 6.29 करोड़ हो गई, जबकि मार्च, 2023 में 5.38 करोड़ थी. कुल पेंशनधारकों में एपीवाई के लाभार्थियों की हिस्सेदारी 80.3 फीसदी रही है.
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसी बचत योजनाओं की वजह से चालू वित्त वर्ष में पेंशन क्षेत्र में खासी वृद्धि हुई है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से आज पेश आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार, भारतीय पेंशन क्षेत्र में कुल अंशधारकों की संख्या सितंबर, 2024 तक सालाना आधार पर 16 फीसदी की वृद्धि के साथ 7.83 करोड़ हो गई. सितंबर, 2023 में कुल पेंशन अंशधारकों की संख्या 6.75 करोड़ थी.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से संसद में पेश 2024-25 की आर्थिक सर्वे में कहा गया कि वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने के लिए रणनीतिक और विवेकपूर्ण नीतिगत प्रबंधन के साथ घरेलू बुनियाद को और मजबूत करने की जरूरत होगी. इसमें आगे कहा गया है कि अधिक सार्वजनिक पूंजीगत व्यय और कारोबार को लेकर उम्मीद में सुधार से निवेश गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है.
राष्ट्रीय खातों के पहले अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में देश की वास्तविक GDP में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है. आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 में कहा गया है कि हमें उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026 में वृद्धि 6.3 से 6.8 प्रतिशत के बीच होगी. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, रबी की अच्छी पैदावार से वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में खाद्य कीमतों पर लगाम लगने की संभावना है.
संसद में आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट पेश होने के बाद शेयर बाजार में उछाल देखी गई है. सेंसेक्स में करीब 800 अंकों की तेजी आई है.
आर्थिक सर्वेक्षण में अगले वित्त वर्ष 2025-2026 में 6.3 से 6.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंथा नागेश्वरन और उनकी टीम द्वारा लिखित सर्वेक्षण 2024-25 आज दोपहर संसद में पेश किया गया.
देश में पहली आर्थिक समीक्षा साल 1950-51 में पेश की गई थी. हालांकि तब यह उस बजट दस्तावेज का ही हिस्सा होती थी. लेकिन इसे 1960 के दशक में आम बजट से अलग कर दिया गया. इसे बजट पेश किए जाने से एक दिन पहले संसद में पेश किया जाने लगा.
आम बजट पेश होने से पहले आर्थिक सर्वे को मुख्य आर्थिक सलाहकार की अगुवाई में वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के विभाग का आर्थिक प्रकोष्ठ तैयार करता है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2024-25 को पेश कर दिया. इसके बाद संसद के दोनों सदनों को कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. वित्त मंत्री कल 11 बजे बजट पेश करेंगी.
VIDEO | Finance Minister Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) tables Economic Survey 2024-25 in Lok Sabha. #BudgetSessionWithPTI #Budget2025WithPTI
(Source: Third Party)
(Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/HQDXhuofKE
— Press Trust of India (@PTI_News) January 31, 2025
आर्थिक सर्वे में ये भी जिक्र है कि भारत को विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए हर संभव कोशिश करना चाहिए और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में प्राइवेट भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है.
संसद के बजट सत्र की शुरुआत में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मेरी सरकार का लक्ष्य देश में आधुनिक और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था बनाना है. मेरी सरकार किसानों को फसलों का उचित दाम दिलाने और उनकी आय को बढ़ाने के लिए समर्पित भाव से काम कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा निरंतर किए जा रहे प्रयासों से दलित, आदिवासी और वंचित लोग सर्वाधिक लाभान्वित हो रहे हैं. राष्ट्रपति के अभिभाषण के कुछ देर बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आर्थिक समीक्षा 2024-25 को लोकसभा में पेश कर दिया है. वित्त मंत्री अब कल शनिवार को आम बजट पेश करेंगी. बजट से जुड़े हर छोटी-बड़ी खबर के लिए लगातार पेज पर बने रहें…
Published On – Jan 31,2025 1:28 PM