बृजमोहन दास महाविद्यालय दयालपुर के हिंदी विभाग द्वारा‘दिनकर की राष्ट्रीय चेतना’विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। विषय पर वक्तव्य देते हुए महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं सुगंभीर कवि डॉ.महर्षि अखिलेश ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर आधुनिक युग के अंतिम सार्वजनिक कवि थे। जिनकी रचनाओं में शील और शक्ति का समन्वय परिलक्षित होता है। स्वतंत्रता-संग्राम में जिन कवियों का महत्त्वपूर्ण योगदान है,उनमें दिनकर अप्रतिम हैं। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए बीआरए बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के पूर्व हिंदी के विद्वान प्राध्यापक एवं नवगीतकार डॉ.रवीन्द्र उपाध्याय ने कहा कि पुलिन पर बांसुरी रखकर युगधर्म को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रकवि दिनकर ने अंग्रेजों के खिलाफ तूर्यनाद किया।
दिनकर की रचनाओं में राष्ट्रीयता अपने समग्र रूप में निनादित है। व्याख्यान की अध्यक्षता करते महाविद्यालय के यशस्वी प्राचार्य डॉ.तारकेश्वर पंडित ने कहा कि छायावादी काल के प्रखर राष्ट्रीय चेतना धारक कवियों में दिनकर अग्रणी महाकवि हैं। व्याख्यान संचालन महाविद्यालय के हिंदी विभाग के विद्वान एवं वरीय सहायक प्राध्यापक डॉ.सुभाष कुमार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ.पूजा कुमारी ने किया। -संतोष वर्मा
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